बजट सत्र के दूसरे सेशन की हंगामेदार शुरूआत, NEP, परिसीमन, मणिपुर समेत कई मुद्दों पर केंद्र को घेरा

संसद के बजट सत्र के दूसरे सेशन की शुरूआत हंगामेदार हुई. लोकसभा में विपक्ष ने मणिपुर, परिसीमन समेत कई मुद्दों को लेकर सरकार का विरोध किया. इतना ही नहीं डीएमके सांसदों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के इम्पलीमेंटेशन को लेकर केंद्र पर निशाना साधा. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी पलटवार करते हुए डीएमके पर छात्रों के भविष्य के साथ राजनीति करने का आरोप लगाया है.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरूआत हो चुकी है. इस सत्र में सरकार कई बिल और स्थायी समितियों की रिपोर्ट पेश करेगी. बजट सत्र के दूसरे सत्र की शुरूआत हंगामेदार रही. विपक्ष ने एनईपी, परिसीमन और मणिपुर कई मुद्दों पर हंगामा किया, जिस वजह से कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा. वहीं, राज्यसभा से विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया. बता दें कि संसद के बजट सत्र का दूसरा सेशन 4 अप्रैल तक चलेगा. सरकार इस दौरान वक्फ संशोधन बिल, न्यू इनकम टैक्स बिल समेत कई अहम विधेयक पेश कर सकती है.

एनईपी को लेकर संसद में टकराव

डीएमके सांसदों ने तमिलनाडु में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के इंप्लीमेंटेनशन को लेकर केंद्र पर तीखा हमला किया. विरोध तब और बढ़ गया जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पलटवार करते हुए डीएमके पर छात्रों के भविष्य के साथ राजनीति करने का आरोप लगाया.

गरमागरम बहस के दौरान प्रधान ने डीएमके पर निशाना साधते हुए कहा कि वे बेईमान हैं. वे तमिलनाडु के छात्रों के प्रति जवाबदेह नहीं हैं. वे तमिलनाडु के छात्रों का भविष्य के साथ खेल रहे हैं. उनका एकमात्र काम भाषाई अवरोध पैदा करना है. वे राजनीति कर रहे हैं. वे अलोकतांत्रिक और असभ्य हैं." उनकी टिप्पणी से हंगामा और तेज हो गया तथा डीएमके सांसद विरोध स्वरूप सदन के आसन के समक्ष आ गए.

विपक्ष ने राज्यसभा से किया वॉकआउट

इस बीच, राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने सदन के नेता जेपी नड्डा द्वारा नियम 267 के तहत चर्चा के लिए उनकी बार-बार की गई मांग की आलोचना करने के बाद नाटकीय ढंग से वॉकआउट किया. विपक्ष पर संसदीय कार्यवाही को कमजोर करने का प्रयास करने का आरोप लगाते हुए नड्डा ने कहा कि यह संसद को नीचा दिखाने की एक शातिर साजिश है. विपक्ष बहस नहीं करना चाहता है, लेकिन यह धारणा देना चाहते हैं कि सरकार जवाब नहीं देना चाहती है या बहस में प्रवेश नहीं करना चाहती है.

संसद के बजट सत्र के फिर से शुरू होने पर तनाव फिर से बढ़ गया है, कई विवादास्पद मुद्दों ने राजनीतिक टकराव को बढ़ावा दिया है. मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताएं, मणिपुर में जारी हिंसा और संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन सरकार और विपक्ष के बीच टकराव के मुद्दे बन गए हैं. सरकार के एजेंडे का मुख्य उद्देश्य वक्फ संशोधन विधेयक सहित प्रमुख विधेयकों के लिए संसदीय अनुमोदन प्राप्त करना और बजटीय प्रक्रिया को पूरा करना है.

वित्त मंत्री पेश करेंगी मणिपुर का बजट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मणिपुर के लिए बजट पेश करने वाली हैं, दरअसल, मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी से राष्ट्रपति शासन के लग चुका है. इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हिंसा प्रभावित पूर्वोत्तर राज्य में राष्ट्रपति शासन की घोषणा के लिए संसद की मंजूरी के लिए एक वैधानिक प्रस्ताव पेश कर सकते हैं.

डीएमके ने किया परिसीमन का विरोध

डीएमके ने प्रस्तावित लोकसभा सीट परिसीमन का कड़ा विरोध करने का संकल्प लिया है. डीएमके ने तर्क दिया है कि जनसंख्या-आधारित आवंटन तमिलनाडु, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों को नुकसान पहुंचाएगा. इसके अतिरिक्त, कांग्रेस ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए पारस्परिक शुल्कों के आर्थिक प्रभाव पर चर्चा की मांग की है, संभावित व्यापार व्यवधानों का मुकाबला करने के लिए द्विदलीय रणनीति का आग्रह किया है. आपको बता दें कि बजट सत्र का दूसरा भाग 10 मार्च को शुरू हुआ और 4 अप्रैल को समाप्त होगा. 

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