जिस कुत्ते ने काटा उसी का बचाव करने सुप्रीम कोर्ट पहुंची पीड़ित महिला, वजह सुनकर उड़ जाएंगे होश!
आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से सुनवाई चल रही है. आज सुनवाई के दौरान एक ऐसी महिला के जानवरों के पक्ष में आई, जो एक बार खुद कुत्ते का शिकार हो चुकी है.

नई दिल्ली: देश में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से सुनवाई चल रही है. हाल ही में एक ऐसी घटना हुई, जिसने सबको हैरान कर दिया.एक महिला, जिसे खुद कुत्ते ने काट लिया था, अदालत में पहुंची और कुत्ते का बचाव किया. उन्होंने बताया कि कुत्ते के साथ क्रूरता की गई थी, जिसकी वजह से वह हिंसक हो गया.
कुत्ते के पक्ष में बोली पीड़िता
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान यह महिला कोर्ट पहुंची. उन्होंने जजों से कहा कि उन्हें भी एक कुत्ते ने काट लिया था. लेकिन इसके बाद उन्होंने कुत्ते पर हमला क्यों हुआ, इसकी जांच खुद की. पता चला कि उस कुत्ते के साथ लंबे समय से बहुत बुरा व्यवहार किया जा रहा था. लोग उसे लात मारते थे, पत्थर फेंकते थे और तरह-तरह की क्रूरता करते थे.
महिला ने कहा, "कुत्ता बिना वजह नहीं काटता. उसके साथ क्रूरता करने से उसके मन में डर पैदा हो जाता है. डर के कारण वह बचाव में आक्रामक हो जाता है. मैंने दूसरों की गलत हरकतों की सजा भुगती."
कुत्ते की आक्रामकता की असली वजह समझाई
उन्होंने अदालत को समझाया कि एक प्यार करने वाला और मिलनसार कुत्ता भी अगर लगातार मार खाए तो वह डर से भयानक व्यवहार करने लगता है. डर इंसान की तरह कुत्ते में भी बचाव वाली आक्रामकता पैदा करता है. महिला ने यह भी सुझाव दिया कि अगर पशु जन्म नियंत्रण(ABC) नियम ठीक से लागू किए जाएं तो कुत्तों की संख्या और उनकी आक्रामकता दोनों कम हो सकती है.
कोर्ट ने ABC नियमों पर दिया जोर
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कई बार कहा है कि सभी आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश नहीं दिया गया है. बल्कि ABC नियमों के तहत उन्हें नसबंदी, टीकाकरण और फिर सड़क पर छोड़ने की व्यवस्था होनी चाहिए. कोर्ट ने नगर निकायों पर सख्ती दिखाई है कि वे इन नियमों को सही से लागू नहीं कर रहे, जिससे समस्या बढ़ रही है.
पशु प्रेमियों की ओर से सीनियर एडवोकेट जैसे लोग कोर्ट में पेश हुए और जानवरों के हक की बात की. वहीं पीड़ितों ने भी अपनी बात रखी. लेकिन इस महिला की दलील खास थी क्योंकि वह खुद शिकार थी, फिर भी उन्होंने कुत्ते को दोषी नहीं ठहराया.


