76 हमले और 362 PAK सुरक्षाबलों को मारने का दावा...BLA ने ऑपरेशन हेरोफ II के तहत मुनीर सेना को दी बड़ी चोट

पाकिस्तान से जारी संघर्ष के बीच बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA)ने बड़ा दावा किया है. संगठन के अनुसार ऑपरेशन हेरोफ II के तहत 31 जनवरी से 6 फरवरी तक चले छह दिन के इस अभियान में उसके लड़ाकों ने 14 शहरों में 76 से अधिक हमले किए है. इस हमले में पाकिस्तानी सेना, फ्रंटियर कॉर्प्स, पुलिस और खुफिया एजेंसियों से जुड़े 362 से अधिक लोग मारे गए है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : पाकिस्तान का अशांत बलूचिस्तान प्रांत इन दिनों भीषण हिंसा और रणनीतिक सैन्य संघर्ष का अखाड़ा बना हुआ है. बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने अपने ताजा और अब तक के सबसे बड़े सैन्य अभियान 'ऑपरेशन हेरोफ II' के माध्यम से पाकिस्तानी हुकूमत और सुरक्षा बलों को कड़ी चुनौती पेश की है. 31 जनवरी से 6 फरवरी के बीच चले इस व्यापक मिशन के दौरान 14 अलग-अलग शहरों में भीषण हमले किए गए. इस घटनाक्रम ने न केवल पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा बल्कि वैश्विक निवेशकों और चीन की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं.

6 फरवरी तक जारी रहा ऑपरेशन हेरोफ II
आपको बता दें कि बीएलए के अनुसार, यह विशाल सैन्य अभियान 31 जनवरी की सुबह 5 बजे से आरंभ होकर 6 फरवरी की शाम 4 बजे तक लगातार जारी रहा. इस मिशन को सफल बनाने में संगठन की कई प्रमुख इकाइयों, जैसे मजीद ब्रिगेड, फतेह स्क्वाड और उनकी खुफिया विंग ZIRAB ने सक्रिय भूमिका निभाई. उग्रवादियों ने 14 प्रमुख शहरों में 76 से अधिक समन्वित और घातक हमले किए. इन सुनियोजित हमलों का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तानी सुरक्षा तंत्र की संचार व्यवस्था को ध्वस्त करना और सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाना था.

BLA ने  PAK के 362 कर्मियों को मार गिराया

इस भीषण संघर्ष के दौरान जान-माल की हानि को लेकर दोनों पक्षों के दावों में बड़ा विरोधाभास देखने को मिल रहा है. बलूच लिबरेशन आर्मी ने स्वीकार किया है कि उनके 93 लड़ाके मारे गए हैं, जिनमें मजीद ब्रिगेड के 50 फिदायीन हमलावर भी शामिल थे. दूसरी ओर, संगठन का दावा है कि उन्होंने पाकिस्तानी सेना और पुलिस के लगभग 362 कर्मियों को मार गिराया है. हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने इन आंकड़ों को नकारते हुए कहा है कि सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई में 200 से अधिक उग्रवादियों का खात्मा किया है.

हिरासत में 17 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी

हिंसा के साथ-साथ बीएलए ने सुरक्षाकर्मियों को बंधक बनाने का सनसनीखेज दावा भी किया है. संगठन के मुताबिक, उनके लड़ाकों ने 17 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों को हिरासत में लिया था, जिनमें से 10 को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है. शेष सात कर्मी अभी भी उनकी कैद में हैं, जिन पर कथित युद्ध अपराधों के आरोपों के तहत कार्रवाई करने की बात कही जा रही है. इस दावे ने पाकिस्तानी रक्षा प्रतिष्ठानों में चिंता बढ़ा दी है और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

सुरक्षा को लेकर चिंता में चीन जैसे बड़े निवेशक 

बलूचिस्तान में जारी इस निरंतर संघर्ष का व्यापक असर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और विदेशी निवेश पर पड़ रहा है. लगातार होने वाले हमलों और असुरक्षा के माहौल के कारण चीन जैसे बड़े निवेशक अपनी परियोजनाओं की सुरक्षा को लेकर आशंकित हैं. रणनीतिक ठिकानों और चेकपोस्टों को निशाना बनाने से एक अनिश्चितता का माहौल व्याप्त हो गया है. विदेशी कंपनियां अब ऐसे जोखिम भरे इलाकों में पूंजी निवेश करने से कतरा रही हैं, जिससे पाकिस्तान की पहले से ही लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को और अधिक क्षति पहुंच रही है.

अपने अभियानों का प्रचार कर रही BLA की मीडिया विंग 

यह लड़ाई अब केवल मैदान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सघन मनोवैज्ञानिक युद्ध का रूप अख्तियार कर चुकी है. बीएलए की मीडिया विंग 'हक्कल' सक्रिय रूप से अपने अभियानों का प्रचार कर रही है ताकि सरकारी अधिकारियों और सुरक्षा बलों में भय व्याप्त हो सके. विशेषज्ञों का मानना है कि इन बड़े और संगठित हमलों का असर वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान की छवि पर पड़ रहा है. लगातार बढ़ता तनाव बलूचिस्तान में स्थिरता लाने की कोशिशों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बनकर उभरा है.

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