दुश्मनों की उड़ जाएगी नींद, ताकत बढ़ाने पर लगातार काम कर रहा भारतीय वायुसेना...तेज हुई 114 राफेल विमान खरीदने की प्रक्रिया

भारतीय वायुसेना अपनी ताकत को लगातार बढ़ाने में लगी हुई है. इसका अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में वायुसेना के बेड़े में कई अत्याधुनिक राफेल शामिल है. इसके बावजूद 114 राफेल विमानों की खरीद की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. राष्ट्रपति मैक्रों की आगामी यात्रा के दौरान इस डील पर मुहर लग सकती है, जिससे भारत की सैन्य शक्ति को बड़ी मजबूती मिलेगी.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : भारतीय आकाश की सुरक्षा को अभेद्य बनाने की दिशा में रक्षा मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है. वायुसेना के बेड़े में अत्याधुनिक राफेल विमानों की संख्या बढ़ाने के लिए 114 नए विमानों की खरीद प्रक्रिया अब तेज हो गई है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में इस भारी-भरकम सौदे पर मुहर लगने की संभावना है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत पड़ोसी देशों की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर पूरी तरह सतर्क है.

भारत में होगा 96 विमानों का निर्माण 

आपको बता दें कि 114 राफेल विमानों के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में 'मेक इन इंडिया' मिशन पर विशेष जोर दिया गया है. योजना के अनुसार, केवल 18 विमान फ्रांस से सीधे उड़ान भरने वाली स्थिति में आएंगे, जबकि बाकी विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा. उम्मीद है कि करीब 80 प्रतिशत विमानों का उत्पादन घरेलू स्तर पर होगा. इसमें फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन और भारतीय निजी कंपनियां मिलकर काम करेंगी. इस सौदे में 88 सिंगल सीटर और 26 ट्विन सीटर विमानों का प्रस्ताव रखा गया है.

रक्षा बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी

भारत ने इस वर्ष अपने रक्षा बजट में करीब 15 प्रतिशत की भारी वृद्धि की है, जो अब बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद पैदा हुई सामरिक स्थितियों को देखते हुए सेनाओं के आधुनिकीकरण पर 1.85 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. बजट का यह बड़ा हिस्सा नई तकनीकों और हथियारों की खरीद के लिए समर्पित है. रक्षा बजट का यह आवंटन देश की कुल जीडीपी का लगभग 1.99 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है.

जल्द भारत आ सकते हैं इमैनुएल मैक्रों 

फरवरी के मध्य में भारत में आयोजित होने वाली एआई समिट में शिरकत करने के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत आ रहे हैं. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा के दौरान ही 3.25 लाख करोड़ रुपये की इस मेगा डील को अंतिम रूप दिया जाएगा. हाल ही में रक्षा खरीद बोर्ड ने इस परियोजना को मंजूरी दे दी है. इसके बाद तकनीकी और व्यावसायिक स्तर पर औपचारिक बातचीत का रास्ता साफ हो गया है, जिससे आने वाले समय में वायुसेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी.

आधुनिक विमानों की सख्त जरूरत 

जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच बढ़ती सैन्य करीबी को देखते हुए भारत रक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ा रहा है. ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए वायुसेना को आधुनिक युद्धक विमानों की सख्त जरूरत है. इस डील के सफल होने के बाद भारतीय वायुसेना के पास कुल 176 राफेल विमानों का विशाल बेड़ा होगा. यह संख्या किसी भी संभावित दोहरे मोर्चे के युद्ध में भारत को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़त दिलाने के साथ-साथ दुश्मनों के मन में प्रभावी खौफ पैदा करेगी.

(R&D) के लिए 17,250 करोड़ रुपये का प्रावधान 

सरकार केवल विमान खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि रक्षा क्षेत्र में शोध और विकास (R&D) पर भी निवेश बढ़ा रही है. इस बार आरएंडडी के लिए 17,250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछली बार से काफी अधिक है. सेना की पेंशन और आधुनिकीकरण के लिए भी अलग से बड़ी राशि आवंटित की गई है. भारत की दीर्घकालिक रणनीति रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की है ताकि विदेशी निर्भरता को कम करते हुए अपने घरेलू उद्योगों को भविष्य की वैश्विक शक्ति बनाया जा सके.

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