खून से लथपथ नजारा, भय, हिंसा और असुरक्षा का माहौल...बांग्लादेश में लोकतंत्र के चीरहरण पर शेख हसीना ने मुहम्मद यूनुस पर किया वार
शेख हसीना ने अंतरिम यूनुस प्रशासन पर बांग्लादेश को अराजकता में धकेलने का आरोप लगाया. उन्होंने लोकतंत्र, मानवाधिकारों और अल्पसंख्यकों पर हमलों की बात कही तथा आगामी चुनावों की वैधता पर सवाल उठाए.

नई दिल्लीः बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग की अध्यक्ष शेख हसीना ने अंतरिम यूनुस प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि देश को सुनियोजित तरीके से घातक अराजकता की ओर धकेला गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में लोकतंत्र अब एक खून से सने परिदृश्य में निर्वासन झेल रहा है और देश अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है.
ऑडियो संदेश में जताई गहरी चिंता
दक्षिण एशिया के विदेशी संवाददाताओं के क्लब (SAFJC) द्वारा आयोजित एक संवाद सत्र के दौरान प्रसारित अपने ऑडियो संदेश में शेख हसीना ने कहा कि जो बांग्लादेश कभी शांति, स्थिरता और विकास का प्रतीक था, आज वहां भय, हिंसा और असुरक्षा का माहौल है. उन्होंने दावा किया कि आम नागरिकों का जीवन संकट में है और लोकतांत्रिक संस्थाएं बुरी तरह कमजोर हो चुकी हैं.
अगस्त 2024 के घटनाक्रम का जिक्र
शेख हसीना ने अगस्त 2024 में हुए हिंसक प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन को एक साजिश करार दिया. उन्होंने कहा कि इन्हीं घटनाओं के बाद उन्हें देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा और भारत में शरण लेनी पड़ी. इसी राजनीतिक उथल-पुथल के बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में कार्यभार संभाला.
लोकतंत्र और मानवाधिकारों पर हमले का आरोप
पूर्व प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि मौजूदा शासन में लोकतंत्र का दमन हुआ है, नागरिक स्वतंत्रताएं छीनी गई हैं और कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. उन्होंने कहा कि देश में हिंसा, यातना और यौन उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ी हैं, जिनका सबसे ज्यादा शिकार महिलाएं और कमजोर वर्ग हो रहे हैं. हसीना के अनुसार, बांग्लादेश अब “एक विशाल जेल और फांसी के मैदान” जैसा बनता जा रहा है.
अल्पसंख्यकों पर हमलों का मुद्दा
अपने बयान में शेख हसीना ने धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा की ओर भी इशारा किया. उन्होंने कहा कि चरमपंथी और सांप्रदायिक ताकतों ने विदेशी समर्थन के साथ मिलकर देश की सामाजिक संरचना को नुकसान पहुंचाया है.
चुनावों की वैधता पर सवाल
शेख हसीना ने 12 फरवरी को प्रस्तावित आम चुनावों को लेकर गंभीर आशंका जताई. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी पार्टी अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोका गया, तो इन चुनावों की वैधता पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है. उनके अनुसार, किसी भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता तभी बनी रह सकती है जब सभी प्रमुख राजनीतिक दलों को समान अवसर मिले.
अंतरिम सरकार का पक्ष
वहीं, मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है. सरकार का कहना है कि वह देश में स्थिरता बहाल करने, हिंसा पर काबू पाने और स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है. हालांकि, आलोचकों का मानना है कि राजनीतिक गतिविधियों पर लगे प्रतिबंध और सुरक्षा हालात को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं.


