बांग्लादेश, श्रीलंका के बाद अब नेपाल में सरकार को झुकाया, आखिर क्यों भड़का युवाओं का गुस्सा?
नेपाल में सोशल मीडिया बैन से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन भ्रष्टाचार और सत्ता-विरोधी जनाक्रोश में बदलकर पीएम केपी शर्मा ओली के इस्तीफे तक पहुंच गया. ये आंदोलन बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों में हुए युवा-आंदोलनों की कड़ी बन गया है.

Nepal Protest: नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन ने ऐसा रूप लिया जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी. शुरुआत में इसे महज इंस्टाग्राम ना चला पाने से नाराज युवाओं का गुस्सा समझा गया, लेकिन देखते ही देखते ये आंदोलन व्यापक भ्रष्टाचार और सत्ता के खिलाफ जनाक्रोश में बदल गया. हालात इतने बिगड़े कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा. इससे पहले बांग्लादेश और श्रीलंका भी इसी तरह के युवा-आंदोलनों से सत्ता परिवर्तन देख चुके हैं.
सोशल मीडिया बैन से शुरू हुआ आंदोलन
नेपाल सरकार ने हाल ही में सोशल मीडिया ऐप्स पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया था. शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों को जेन-Z युवाओं ने नेतृत्व दिया और जल्द ही ये आंदोलन केवल ‘फ्री स्पीच’ तक सीमित ना रहकर भ्रष्टाचार और सत्ता परिवर्तन की मांग में तब्दील हो गया.
टिकटॉक, जो उस समय बैन नहीं था, उस पर वायरल हुए वीडियो ने आंदोलन को और तेज कर दिया. इनमें साधारण युवाओं के जीवन और नेताओं के बच्चों की आलीशान जीवनशैली के बीच तुलना दिखाई गई. इसी दौरान हैशटैग्स जैसे #NepoKid, #NepoBabies, #PoliticiansNepoBabyNepal ट्रेंड करने लगे, जिससे नेताओं की वंशवादी राजनीति पर सवाल खड़े हुए.
वित्तीय घोटाले बने आंदोलन का प्रतीक
हाल ही में राष्ट्रीय एयरलाइन द्वारा विमान खरीद में हुए कथित घोटाले की जांच रिपोर्ट भी युवाओं के गुस्से का कारण बनी. नेपाल का ये आंदोलन कोई अकेली घटना नहीं है. बांग्लादेश में जुलाई 2024 में छात्रों ने सरकारी नौकरियों में विवादित कोटा व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन छेड़ा था. ये आंदोलन जल्द ही भ्रष्टाचार और सत्ता की विरासत के खिलाफ गुस्से में बदल गया. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़कर भागना पड़ा और अब नोबेल विजेता अर्थशास्त्री मुहम्मद यूनुस अंतरिम शासन का नेतृत्व कर रहे हैं.
श्रीलंका में भी 2022 में महंगाई, भ्रष्टाचार और आर्थिक कुप्रबंधन के खिलाफ युवा सड़कों पर उतर आए थे. सोशल मीडिया बैन लगाने की कोशिश नाकाम रही और #GoHomeGota जैसे हैशटैग ने राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे की सत्ता को हिला दिया. 2024 के चुनावों में वामपंथी गठबंधन सत्ता में आया, जिसमें सबसे अधिक युवा और महिला सांसद चुने गए.
नेपाल में आगे का रास्ता
नेपाल में भी आंदोलन के दौरान विपक्षी नेताओं के घरों पर हमले हुए, जिससे साफ है कि यह आंदोलन किसी एक पार्टी या विचारधारा से प्रेरित नहीं है. भारत ने नेपाल में हुई हिंसा और प्रदर्शनकारियों की मौत की निंदा की है. अधिकारियों ने कहा कि सीमा पर सतर्कता बढ़ा दी गई है, लेकिन नेपाल की अशांति का असर भारत में फैलने की आशंका नहीं है.


