ब्लॉकेड तोड़ने की कोशिश हुई नाकाम, अमेरिका ने ईरानी तेल ले जा रहे जहाज को रोका

अरब सागर में अमेरिकी सेना ने एक जहाज को रोककर ईरान के प्रतिबंधों को सख्ती से लागू किया है. इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर की आशंका जताई जा रही है.

Shraddha Mishra

अरब सागर में एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खुलकर सामने आ गया है. अमेरिकी सेना ने एक ऐसे व्यापारी जहाज को रोक लिया, जो कथित तौर पर प्रतिबंधों को दरकिनार कर ईरानी तेल लेकर आगे बढ़ रहा था. इस कार्रवाई ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है और समुद्री सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है. अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने शनिवार को जानकारी दी कि उसने अरब सागर में एक मर्चेंट जहाज को रोक दिया है. इस जहाज का नाम “सेवान” बताया गया है.

अमेरिका के अनुसार, यह जहाज ईरान पर लगे प्रतिबंधों को तोड़कर तेल और गैस उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा था. अमेरिकी सेना की चेतावनी के बाद जहाज ने दिशा बदल ली है और अब वह ईरान की ओर लौट रहा है. इस पूरी कार्रवाई के दौरान अमेरिकी नौसेना का हेलीकॉप्टर जहाज के ऊपर नजर रखे हुए था.

क्या है ‘शैडो फ्लीट’?

जिस जहाज को रोका गया, वह तथाकथित “शैडो फ्लीट” का हिस्सा बताया जा रहा है. यह 19 जहाजों का एक समूह है, जो ईरान के तेल और गैस को गुप्त तरीके से दूसरे देशों तक पहुंचाने का काम करता है. अमेरिका ने इन सभी जहाजों पर प्रतिबंध लगा रखा है. आरोप है कि ये जहाज प्रोपेन, ब्यूटेन समेत कई ऊर्जा उत्पादों को छिपाकर विदेशों में बेचते हैं, जिससे ईरान को भारी आर्थिक फायदा होता है.

USS पिंकनी से हुई कार्रवाई

इस ऑपरेशन को अमेरिकी नौसेना के गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS Pinckney से अंजाम दिया गया. इसी युद्धपोत से एक हेलीकॉप्टर ने उड़ान भरकर “सेवान” जहाज को बीच समुद्र में रोका. हेलीकॉप्टर के जरिए जहाज को निर्देश दिए गए कि वह अमेरिकी आदेशों का पालन करे. जहाज के कप्तान और चालक दल ने बिना विरोध के इन निर्देशों को मान लिया और वापस लौटने का फैसला किया.

अब तक कितने जहाज रोके गए?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, जब से यह समुद्री प्रतिबंध लागू किया गया है, तब से अब तक 37 जहाजों को रोका या वापस भेजा जा चुका है. “सेवान” भी इन्हीं जहाजों में शामिल है. इन सभी जहाजों को ईरान की “शैडो फ्लीट” का हिस्सा माना जा रहा है, जो प्रतिबंधों के बावजूद तेल और गैस का व्यापार जारी रखने की कोशिश कर रहे थे.

अमेरिका की इस सख्ती का सीधा असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. तेल और गैस ईरान की आय का सबसे बड़ा स्रोत हैं. अगर इन उत्पादों का निर्यात रुकता है, तो देश को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. अमेरिका का कहना है कि यह कदम ईरान को दबाव में लाने और उसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से उठाया गया है.

बढ़ता समुद्री तनाव और वैश्विक असर

इस घटना के बाद अरब सागर में तनाव और बढ़ गया है. पहले से ही ईरान और अमेरिका के बीच रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं, और अब इस तरह की कार्रवाइयों से हालात और जटिल हो सकते हैं. दुनिया के कई देश इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है. ऊर्जा बाजार में हलचल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

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