बांग्लादेश के चुनाव बाद नई सत्ता के सामने भरोसे की असली परीक्षा अब शुरू

करीब डेढ़ साल की खींचतान के बाद बांग्लादेश में चुनाव हो गए हैं। अब सबकी नजर नई सरकार पर है। सवाल सिर्फ जीत का नहीं है। असली सवाल भरोसे का है। जनता क्या सच में संतुष्ट होगी?

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

बांग्लादेश में लंबे इंतजार के बाद वोट डाले गए। छात्र आंदोलन के बाद पुरानी सत्ता गई। अंतरिम सरकार आई। फिर चुनाव की तैयारी शुरू हुई। लोगों ने लाइन में लगकर मतदान किया। कई जगह देर रात तक वोट पड़े। माहौल पहले जैसा तनाव भरा नहीं था। लेकिन लोगों के मन में सवाल अब भी जिंदा हैं। क्या यह वही लोकतंत्र है जिसकी मांग हुई थी।

अवामी लीग की गैर मौजूदगी क्यों?

इस चुनाव की सबसे बड़ी बात रही अवामी लीग की दूरी। शेख हसीना की पार्टी मैदान में नहीं थी। यह फैसला स्वेच्छा से नहीं हुआ। हालात ऐसे बने कि पार्टी चुनाव से बाहर हो गई। आजादी के बाद से अवामी लीग देश की राजनीति का अहम चेहरा रही है। ऐसे में उसका न होना चर्चा का विषय बना। कई लोग इसे लोकतंत्र की अधूरी तस्वीर मान रहे हैं।

क्या परिणाम तय करेंगे दिशा?

इन चुनावों को भविष्य की कुंजी माना जा रहा है। नई सरकार की नीति क्या होगी। खासकर भारत के साथ संबंध कैसे रहेंगे। यह सब नतीजों पर निर्भर करेगा। जुलाई चार्टर पर भी जनमत लिया गया है। इससे व्यवस्था की नई दिशा तय होगी। मतदान प्रतिशत करीब पचास के आसपास रहा। लोगों की भागीदारी ने संकेत जरूर दिए हैं।

हिंसा की खबरें कितनी गंभीर?

मतदान के दौरान हालात काफी हद तक शांत रहे। फिर भी कुछ जगह झड़प हुई। एक जगह बीएनपी नेता की मौत की खबर आई। अल्पसंख्यकों के खिलाफ घटनाओं ने चिंता बढ़ाई। चुनाव सिर्फ वोट डालने का नाम नहीं होता। सुरक्षा और विश्वास भी जरूरी है। अगर डर का माहौल रहेगा तो लोकतंत्र कमजोर पड़ेगा।

क्या नतीजों पर उठेंगे सवाल?

अवामी लीग ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद युनूस ने इसे सफल बताया। असली कसौटी नतीजों के बाद शुरू होगी। बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी मुख्य दावेदार हैं। बीएनपी नेता तारिक रहमान ने निष्पक्ष गिनती की मांग की है। अगर देरी हुई तो अटकलें बढ़ेंगी। देश को साफ और समय पर परिणाम चाहिए।

नई सरकार की पहली जिम्मेदारी क्या?

सत्ता में जो भी आएगा, उसे जनता का भरोसा जीतना होगा। बेरोजगारी बड़ी समस्या है। महंगाई से लोग परेशान हैं। अंतरिम सरकार आम लोगों को संतुष्ट नहीं कर सकी। अब उम्मीद नई सरकार से है। वादों को जमीन पर उतारना होगा। सिर्फ बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। जनता अब ज्यादा जागरूक है। चुनाव खत्म होना कहानी का अंत नहीं है। यह शुरुआत है। नई सरकार को विपक्ष को साथ लेकर चलना होगा।

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। पड़ोसी देशों से संतुलित रिश्ते रखने होंगे। सबसे अहम बात है पारदर्शिता। अगर फैसले साफ होंगे तो भरोसा बनेगा। बांग्लादेश के लिए यही असली परीक्षा है।

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag