दुनिया पर राज करने की जंग: ट्रंप, पुतिन या शी जिनपिंग में कौन मारेगा बाजी?

विश्व की महाशक्तियां अब अपनी ताकत और चतुर रणनीतियों से ग्लोबल पावर बैलेंस को बदलने में जुट गई हैं. ट्रंप 'अमेरिका फर्स्ट' नीति से तुरंत असर दिखाना चाहते हैं, वहीं चीन-रूस आर्थिक, सैन्य और कूटनीतिक मोर्चों पर लंबी सांस लेकर अपना दबदबा बढ़ा रहे हैं.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

Russia America China Clash: डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अमेरिका की ताकत को केंद्र में रखकर वैश्विक राजनीति को देखने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि चीन और रूस अपने-अपने प्रभाव क्षेत्रों को मज़बूत करने और उनका विस्तार करने में जुटे हुए हैं. विश्लेषकों का मानना है कि ये तीनों देश मिलकर एक नई वैश्विक व्यवस्था की दिशा तय कर रहे हैं, जिसका असर यूरोप और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों पर भी पड़ना तय है. ट्रंप प्रशासन के दौर में अमेरिका ने अपनी विदेश नीति को नए सिरे से परिभाषित करते हुए पश्चिमी गोलार्ध पर विशेष ध्यान देना शुरू किया है. अधिकारियों के मुताबिक यह ‘अमेरिका फ़र्स्ट’ नीति का हिस्सा है, ट्रंप के शीर्ष सलाहकार स्टीफ़न मिलर के शब्दों में, दुनिया एक ऐसी जगह बनती जा रही है जहां ताकत से शासन होता है, बल से शासन होता है और शक्ति से शासन होता है. यह सोच 20वीं सदी की शुरुआत में अमेरिकी साम्राज्य विस्तार की नीतियों की याद दिलाती है. हालांकि ट्रंप शांति समझौतों और मध्यस्थता में भी रुचि दिखा रहे हैं, लेकिन उनका निजी दृष्टिकोण अमेरिकी विदेश नीति को लगातार प्रभावित करता दिख रहा है.इसके साथ ही अमेरिका ने लैटिन अमेरिकी देशों के राष्ट्रीय चुनावों में ख़ास उम्मीदवारों और पार्टियों के लिए वकालत की,साथ ही ट्रंप ने पनामा नहर, ग्रीनलैंड और कनाडा के अमेरिका में विलय की भी मांग की.

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