बांग्लादेश में BJP को मिली करारी हार...हाथी और साइकिल को भी जनता ने नकारा, BNP ने हासिल की बहुमत
बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में बीएनपी ने 209 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया. जमात-ए-इस्लामी गठबंधन को 77 सीटें मिलीं. आवामी लीग बैन के कारण चुनाव नहीं लड़ सकी. छात्रों की नई पार्टी एनसीपी का प्रदर्शन कमजोर रहा. कई छोटे दल पूरी तरह हार गए.

नई दिल्ली : 12 फरवरी 2025 को बांग्लादेश में हुए आम चुनाव ने राजनीति का पूरा नक्शा बदल दिया. 18 महीने की अस्थिरता और हिंसा के बाद यह चुनाव ऐतिहासिक रहा. शेख हसीना की आवामी लीग पर प्रतिबंध के कारण वह मैदान में नहीं उतर सकी. बीएनपी ने जबरदस्त वापसी की और बहुमत हासिल किया. साथ ही कई छोटी पार्टियों का सफाया हो गया. दिलचस्प बात यह रही कि भारत की कई पार्टियों से मिलते-जुलते नाम और चुनाव चिह्न वाली पार्टियां भी चुनाव में थीं लेकिन जनता ने उन्हें ठुकरा दिया.
बीएनपी की शानदार जीत
आपको बता दें कि बीएनपी ने 299 सीटों में से 209 पर कब्जा जमाया. गठबंधन को कुल 212 सीटें मिलीं. तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगरा-6 दोनों सीटों से जीत दर्ज की. 17 साल बाद देश लौटे तारिक के लिए यह जीत बहुत मायने रखती है. सहयोगी दलों गणोसम्हति आंदोलन, बांग्लादेश जातीय पार्टी और गोनो ओधिकार परिषद को एक-एक सीट मिली.
जमात गठबंधन की मजबूत उपस्थिति
जमात-ए-इस्लामी ने 68 सीटें जीतकर दूसरा सबसे बड़ा दल बनकर उभरी. गठबंधन को कुल 77 सीटें हासिल हुईं. छात्र नेताओं की नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) को 6 सीटें मिलीं. बांग्लादेश खिलाफत मजलिस को दो और खिलाफत मजलिस को एक सीट मिली. कुछ सीटों पर स्वतंत्र उम्मीदवार भी जीते लेकिन कई बड़े दल जैसे जासद, वर्कर्स पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी का खाता नहीं खुल सका.
भारतीय चिह्नों वाली पार्टियों का सफाया
चुनाव में भारत से मिलते-जुलते नाम और सिंबल वाली पार्टियां खासी चर्चा में रहीं. बैलगाड़ी चिह्न वाली बांग्लादेश जातीय पार्टी (बीजेपी) को सिर्फ एक सीट मिली. हाथी चिह्न वाली बांग्लादेश रिपब्लिकन पार्टी और साइकिल चिह्न वाली जातीय पार्टी का खाता खाली रहा. हाथ और लालटेन चिह्न वाली पार्टियां भी पूरी तरह नाकाम रहीं. जनता ने इन दलों को बिल्कुल नकार दिया.
ऐतिहासिक जनमत संग्रह और मतदान
इस बार हर मतदाता ने दो वोट डाले. एक सरकार चुनने के लिए और दूसरा संविधान संशोधन के जनमत संग्रह के लिए. जनता ने भारी बहुमत से 'हां' में वोट दिया. मतदान प्रतिशत 59.44 रहा. करीब 12.7 करोड़ मतदाताओं में युवा और पहली बार वोट देने वाले बड़ी संख्या में शामिल थे. सुरक्षा के लिए दस लाख सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए.


