हमारे मामलों से दूर रहो... होर्मुज पर US की नाकेबंदी पर भड़का चीन, अमेरिका को दी सीधी चेतावनी
अमेरिका की नाकेबंदी के बाद चीन ने सख्त रुख अपनाते हुए अपने हितों की रक्षा की बात कही है. इस पूरे घटनाक्रम से वैश्विक तनाव और तेल बाजार पर असर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने अब वैश्विक राजनीति को और अधिक गर्मा दिया है. अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी के फैसले के बाद हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं. इस कदम से न केवल मध्य पूर्व बल्कि दुनिया के बड़े देशों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं. खासतौर पर चीन ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका को साफ संदेश दे दिया है. चीन ने अमेरिका की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि वह अपने हितों में किसी भी तरह की बाहरी दखल को स्वीकार नहीं करेगा.
चीन के रक्षा मंत्री डोंग जुन ने स्पष्ट किया कि उनका देश क्षेत्र में शांति चाहता है, लेकिन ईरान के साथ उसके व्यापार और ऊर्जा संबंध बेहद अहम हैं. उन्होंने कहा कि चीन अपने समझौतों का पूरी तरह पालन करेगा और उम्मीद करता है कि दूसरे देश भी उसके मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि चीन के जहाज लगातार होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे हैं और आगे भी ऐसा ही जारी रहेगा.
नाकेबंदी के पीछे की वजह
संयुक्त राज्य अमेरिका ने यह कदम तब उठाया जब पाकिस्तान में हुई ईरान के साथ बातचीत सफल नहीं हो सकी. इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाकेबंदी के आदेश दिए. इस फैसले का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ा है, खासकर उन देशों पर जो इस समुद्री रास्ते पर निर्भर हैं.
इस मुद्दे पर सिर्फ चीन ही नहीं, बल्कि अन्य देशों ने भी चिंता जताई है. स्पेन की रक्षा मंत्री मार्गरीटा रोब्लेस ने इसे बेवजह का कदम बताते हुए कहा कि इससे दुनिया और अधिक अस्थिर हो सकती है. वहीं, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने कहा कि उनके देश को इस नाकेबंदी में शामिल होने के लिए कोई अनुरोध नहीं मिला है और यह जरूरी है कि समुद्री रास्ते सभी देशों के लिए खुले रहें.
तेल की कीमतों में उछाल
इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी साफ नजर आ रहा है. नाकेबंदी की खबर के बाद तेल की कीमतों में तेजी आई है. ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया है, जबकि अमेरिकी क्रूड भी ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो ऊर्जा बाजार में अस्थिरता लंबे समय तक बनी रह सकती है.
ईरान की चेतावनी
ईरान ने भी इस कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है. ईरान ने संकेत दिया है कि वह फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बंदरगाहों को निशाना बना सकता है. इससे यह साफ हो गया है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय और बढ़ सकता है.
समुद्री सुरक्षा पर खतरा
समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने भी स्थिति को गंभीर बताया है. यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने जहाजों को सतर्क रहने की सलाह दी है. रिपोर्ट के अनुसार, भले ही गैर-ईरानी जहाजों के लिए रास्ता पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन उन्हें क्षेत्र में भारी सैन्य गतिविधियों का सामना करना पड़ सकता है.


