ट्रंप के इस बड़े फैसले से भारत के लिए मुश्किलें...चीन के लिए बना अवसर
ईरान के चाबहार बंदरगाह पर अमेरिका के ताजा कदम ने भारत के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकारी आदेश के तहत विदेश मंत्री मार्को रुबियो को चाबहार पर लगाए गए प्रतिबंधों में दी गई छूट को रद्द करने या संशोधित करने का निर्देश दिया गया है. चाबहार बंदरगाह पाकिस्तान को दरकिनार कर भारत के मध्य एशिया तक पहुंच बनाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

ईरान के चाबहार बंदरगाह पर अमेरिका के ताजा कदम ने भारत के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकारी आदेश के तहत विदेश मंत्री मार्को रुबियो को चाबहार पर लगाए गए प्रतिबंधों में दी गई छूट को रद्द करने या संशोधित करने का निर्देश दिया गया है. चाबहार बंदरगाह पाकिस्तान को दरकिनार कर भारत के मध्य एशिया तक पहुंच बनाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. पिछले साल भारत ने इस बंदरगाह के विकास और संचालन के लिए ईरान के साथ 10 साल का समझौता किया था.
भारत के लिए असहज स्थिति
अमेरिका का यह कदम भारत के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है, जबकि इसके प्रतिद्वंद्वी चीन के लिए यह एक अवसर बन गया है. चीन ने पाकिस्तान के ग्वादर में स्थित गहरे पानी के बंदरगाह में भारी निवेश किया है, जिससे उसे व्यापार के रास्ते खुलने के साथ हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का मौका मिल रहा है. हालांकि, चीन की ग्वादर परियोजना अब तक सफल नहीं हो पाई है, जबकि भारत ने चाबहार से व्यापार शुरू कर दिया है.
ट्रंप का यह आदेश ईरान पर अधिकतम दबाव अभियान को फिर से लागू करने का हिस्सा है, लेकिन इसका असर भारत के रणनीतिक हितों पर भी पड़ने की संभावना है. भारतीय पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड और ईरान के बंदरगाह और समुद्री संगठन ने 2024 तक चाबहार सौदा किया था. आईपीजीएल ने 2018 में चाबहार बंदरगाह का संचालन संभाला था और तब से 90,000 से अधिक कंटेनर और 8.4 मिलियन टन से अधिक थोक कार्गो को संभाला है. ट्रंप के आदेश से भारत की रणनीतिक स्थिति कमजोर होने का खतरा है.
चाबहार बंदरगाह भारत के संबंधों को मजबूत करता है
चाबहार बंदरगाह भारत के लिए सिर्फ आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह एक रणनीतिक संपत्ति भी है, जो अस्थिर पड़ोसी क्षेत्रों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करता है. यह बंदरगाह भारत, ईरान, रूस और अन्य देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे का हिस्सा भी है. अगर इस पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू होते हैं तो भारत के मध्य एशिया में प्रभाव को नुकसान हो सकता है और चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की भारत की कोशिशों पर असर पड़ेगा.
अमेरिका का यह कदम भारत के लिए एक नई चुनौती साबित हो सकता है. खासकर जब भारत अमेरिका के साथ अपनी व्यापक इंडो-पैसिफिक रणनीतियों में सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. अगर चाबहार पर छूट निरस्त हो जाती है, तो यह QUAD (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के गठबंधन) पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है.


