ट्रंप की ईरान पर हमले के बाद पाकिस्तान में मची खलबली! अब पाक को सता रहा टुकड़े होने का डर
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले की जानकारी भी धीरे-धीरे सामने आ रही है. इस हमले को लेकर ईरान से ज्यादा चिंता पाकिस्तान को सता रहा है.

नई दिल्ली: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर हमले की योजनाओं ने पाकिस्तान को चिंता में डाल दिया है. अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो वहां सत्ता बदल सकती है, जिसका सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ सकता है. पाकिस्तान को डर है कि इससे उसके बलूचिस्तान प्रांत में विद्रोह बढ़ेगा और देश टूटने की कगार पर आ सकता है. दोनों देशों की सीमा करीब 900 किलोमीटर लंबी है, जो पाकिस्तान के संवेदनशील इलाकों से सटी हुई है.
ईरान पर हमला बना पाकिस्तान के लिए खतरा
पाकिस्तान के विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में किसी भी तरह की उथल-पुथल पाकिस्तान के लिए मुसीबत बन सकती है. अगर ट्रंप की योजना के तहत अमेरिका हमला करता है तो ईरान में अराजकता फैल सकती है. इससे सीमा पार से उग्रवाद, हथियारों की तस्करी और शरणार्थियों का आना बढ़ सकता है.
पाकिस्तान के एक प्रमुख अखबार में छपे लेख के अनुसार, ईरान में सत्ता बदलाव पाकिस्तान के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है. पूर्व राजदूत आसिफ दुर्रानी कहते हैं कि ईरान में कोई बदलाव, चाहे वह आंतरिक हो या बाहरी, पाकिस्तान को सीधे प्रभावित करेगा.
बलूचिस्तान में विद्रोह का डर
पाकिस्तान सबसे ज्यादा बलूचिस्तान को लेकर चिंतित है. यह प्रांत ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान से लगा हुआ है, जहां बलूच लोग रहते हैं. दोनों तरफ के बलूचों के बीच जातीय और भाषाई संबंध हैं. अगर ईरान अस्थिर होता है तो पाकिस्तान के बलूचिस्तान में विद्रोही गुट मजबूत हो सकते हैं.
वे सीमा का फायदा उठाकर हमले बढ़ा सकते हैं. सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में आतंकवाद पर जो काबू पाया है, वह सब बेकार हो सकता है.
बता दें, यहां कई विद्रोही समूह सक्रिय हैं, जो सुरक्षाबलों और चीनी परियोजनाओं को निशाना बनाते हैं. चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) जैसी बड़ी योजना यहां चल रही है, जो अशांति से प्रभावित हो सकती है. बलूच विद्रोही दावा करते हैं कि बलूचिस्तान पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है, जिससे अलगाव का खतरा बढ़ जाता है.
शरणार्थी और आर्थिक संकट की आशंका
ईरान में हमले से पाकिस्तान में शरणार्थियों का नया संकट पैदा हो सकता है. 2021 में अफगानिस्तान से तालिबान के कब्जे के बाद लाखों शरणार्थी पाकिस्तान आए थे, जिसने उसकी अर्थव्यवस्था को झटका दिया. अब अगर ईरान से लोग आते हैं तो आईएमएफ के कर्ज पर चल रहा पाकिस्तान इसे सहन नहीं कर पाएगा.
पूर्व विदेश सचिव जोहर सलीम कहते हैं कि पाकिस्तान ने पहले ईरान-इजरायल तनाव में ईरान की संप्रभुता का समर्थन किया था. वे चेताते हैं कि कोई भी हस्तक्षेप, चाहे आर्थिक हो या सैन्य, स्थिति को बदतर बना देगा.
पाकिस्तान की बढ़ी चिंता
पाकिस्तानी जानकारों का कहना है कि ईरान में जबरन बदलाव का असर सिर्फ पाकिस्तान तक नहीं रहेगा. इससे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ सकता है, प्रॉक्सी युद्ध छिड़ सकते हैं और चीन, रूस जैसी शक्तियां शामिल हो सकती है.
पाकिस्तान नहीं चाहता कि ईरान कमजोर हो, क्योंकि इससे उसके अपने अस्तित्व पर सवाल उठ सकते हैं. कुल मिलाकर, ट्रंप की ईरान नीति पाकिस्तान के लिए बड़ा खतरा बन रही है, जहां टूटने का डर सता रहा है.


