यूरोप में मतभेद, ट्रंप के शांति बोर्ड को 8 इस्लामी देशों का समर्थन

अमेरिका के नेतृत्व में प्रस्तावित “बोर्ड ऑफ पीस” में आठ मुस्लिम-बहुल देशों ने शामिल होने का फैसला किया है और गाजा युद्ध समाप्त करने की पहल का समर्थन जताया है. हालांकि इस योजना को लेकर यूरोप में मतभेद उभरे हैं, जहां फ्रांस, नॉर्वे और स्वीडन जैसे देशों ने इसमें शामिल होने से इनकार किया है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

बुधवार को मुस्लिम बहुल आठ देशों के विदेश मंत्रियों ने यह स्पष्ट किया कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित “बोर्ड ऑफ पीस” में भागीदारी करेंगे. इस कदम के साथ ये देश अमेरिका के नेतृत्व वाली उस शांति पहल का समर्थन करेंगे, जिसने अपनी वैधता और प्रभाव को लेकर यूरोप और मध्य पूर्व में बहस और मतभेद पैदा कर दिए हैं.

विदेश मंत्रियों ने संयुक्त जारी बयान में क्या कहा? 

कतर, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर बताया कि उन्होंने ट्रम्प द्वारा भेजे गए निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है. बयान में कहा गया कि इन देशों ने बोर्ड में शामिल होने का साझा फैसला किया है. हालांकि औपचारिक सदस्यता से पहले प्रत्येक देश अपनी-अपनी आंतरिक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करेगा. उल्लेखनीय है कि मिस्र, पाकिस्तान और यूएई पहले ही इस पहल के प्रति सकारात्मक संकेत दे चुके थे.

विदेश मंत्रियों ने गाजा में जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए ट्रम्प प्रशासन के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयासों का समर्थन दोहराया. उन्होंने कहा कि “बोर्ड ऑफ पीस” को एक संक्रमणकालीन प्रशासन के रूप में देखा जा रहा है, जो गाजा में युद्ध समाप्त करने और आगे की शांति प्रक्रिया को लागू करने में भूमिका निभाएगा.

संयुक्त बयान के अनुसार, बोर्ड का दायरा एक व्यापक योजना पर आधारित है, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 की स्वीकृति प्राप्त है. इस योजना का लक्ष्य स्थायी संघर्षविराम सुनिश्चित करना, गाजा के पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जुटाना और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत फिलिस्तीनी जनता के आत्मनिर्णय व स्वतंत्र राज्य के अधिकार को आगे बढ़ाना है.

हालांकि अमेरिका के नेतृत्व में इस शांति मंच के गठन ने यूरोप में मतभेदों को भी उजागर किया है. फ्रांस के इनकार के बाद नॉर्वे और स्वीडन ने भी इस पहल से दूरी बना ली है. नॉर्वे के राज्य सचिव क्रिस्टोफर थोनर का कहना है कि प्रस्ताव कई ऐसे सवाल खड़े करता है जिन पर अमेरिका के साथ और चर्चा जरूरी है. वहीं स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने स्पष्ट किया कि उनका देश मौजूदा स्वरूप में इसमें शामिल नहीं होगा.

स्लोवेनिया ने नहीं लिया फैसला 

स्लोवेनिया ने भी अब तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है. प्रधानमंत्री रॉबर्ट गोलोब ने चेतावनी दी कि बोर्ड का व्यापक अधिकार क्षेत्र संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर कर सकता है. यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, कनाडा, रूस, यूक्रेन और चीन ने भी अभी तक अपनी स्थिति सार्वजनिक नहीं की है.

व्हाइट हाउस के अनुसार, करीब 50 से 60 देशों को निमंत्रण भेजा गया है, जिनमें से लगभग 30 देशों के शामिल होने की उम्मीद है. इज़राइल, अर्जेंटीना, बहरीन, मोरक्को और वियतनाम जैसे देशों ने सहमति जता दी है. इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का समर्थन खास माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले वे गाजा से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय निगरानी समितियों की आलोचना कर चुके थे.

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