ईरान पर अमेरिका ने क्यों किया हमला? डोनाल्ड ट्रंप ने उगला सच, बोले - जब तेल की कीमतें बढ़ती...'

ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बड़ा बयान दिया है. कच्चे तेल को लेकर ट्रंप ने साफ-साफ कहा है कि तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो अमेरिका को बहुत मुनाफा होता है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है. कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तेल टैंकर फंसे हुए हैं. ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान दिया है.

ट्रंप का बयान

ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है. इसलिए जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो अमेरिका को बहुत मुनाफा होता है, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि राष्ट्रपति के तौर पर उनका सबसे बड़ा ध्यान ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है. 

ट्रंप ने ईरान को "दुष्ट साम्राज्य" बताया और कहा कि यह ज्यादा जरूरी है ताकि मध्य पूर्व और पूरी दुनिया को खतरा न हो. ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी नौसेना ने कहा था कि इस महीने के अंत तक होर्मुज से गुजरने वाले तेल जहाजों की सुरक्षा नहीं दे पाएंगे.

वैश्विक तेल बाजार पर असर

पश्चिम एशिया दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक इलाका है. यहां युद्ध की वजह से तेल का उत्पादन और निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के मुताबिक, यह संकट वैश्विक तेल बाजार के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका बन सकता है.

रिपोर्ट्स बताती हैं कि खाड़ी क्षेत्र के उत्पादकों ने रोजाना करीब 1 करोड़ बैरल तेल उत्पादन कम कर दिया है, जो दुनिया की कुल मांग का लगभग 10 प्रतिशत है. होर्मुज जलडमरूमध्य से पिछले साल रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता था. अब युद्ध के कारण जहाजों की आवाजाही 90 प्रतिशत तक कम हो गई है. भारत और चीन जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह बड़ा संकट है.

अमेरिका की स्थिति अलग

अमेरिका खुद बड़ा तेल उत्पादक है, इसलिए ऊंची कीमतों से उसे फायदा होता है, लेकिन एशिया के लिए खाड़ी क्षेत्र मुख्य स्रोत है. युद्ध से न सिर्फ तेल की सप्लाई प्रभावित है, बल्कि खाड़ी देशों की सुरक्षा भी खतरे में है, जिनकी जिम्मेदारी अमेरिका ने ली हुई है. ईरान लगातार रिफाइनरियों और तेल ठिकानों पर हमले कर रहा है.

ट्रंप का फोकस ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर है, न कि तेल कीमतों को कम करने पर. दुनिया के लिए यह स्थिति चिंता की है, जहां ऊर्जा संकट बढ़ रहा है और कीमतें आसमान छू रही हैं.

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