ट्रंप के भारत-पाक न्यूक्लियर क्राइसिस क्लेम पर ग्लोबल वॉचडॉग चीफ ने लगाई फटकार, फैक्ट-चेक में उड़ा दिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगभग 90 बार दावा किया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच छिड़े विवाद को रोक दिया. लेकिन भारत ने हर बार साफ इनकार किया.किसी तीसरे पक्ष की कोई मदद या हस्तक्षेप नहीं हुआ.

नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले वर्ष मई में हुए तीन दिवसीय सैन्य टकराव को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगातार दावों पर अब अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी ने स्पष्ट रूप से असहमति जताई है. ट्रंप यह कहते रहे हैं कि उन्होंने दोनों देशों के बीच संभावित परमाणु टकराव को टाल दिया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है.
विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान दावोस में IAEA प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने कहा कि भारत-पाकिस्तान संघर्ष पूरी तरह पारंपरिक सैन्य कार्रवाई थी और इसमें परमाणु हथियारों की कोई भूमिका नहीं थी. उन्होंने ट्रंप के बयानों को “राजनीतिक विचार” करार देते हुए कहा कि इस तरह के किसी परमाणु निरीक्षण या संकेत का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है.
IAEA प्रमुख का स्पष्ट बयान
दावोस में मीडिया से बातचीत के दौरान IAEA प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने कहा- इस संघर्ष में परमाणु हथियारों की संलिप्तता का कोई संकेत नहीं मिला, जो निश्चित रूप से पारंपरिक प्रकृति का था. उन्होंने आगे कहा कि अभी तक कोई वास्तविक परमाणु परीक्षण नहीं हुआ है. हमने जो देखा है वह परमाणु हथियारों को पहुंचाने के साधनों का परीक्षण और संचालन है, जो कि परमाणु हथियारों से अलग चीज है, जैसा कि आप जानते हैं. ग्रॉसी के मुताबिक, इस संघर्ष में परमाणु हथियारों से जुड़ी कोई गतिविधि सामने नहीं आई.
ऑपरेशन सिंदूर पर भारतीय सेना का रुख
इससे पहले भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी भी यह साफ कर चुके हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी स्तर पर परमाणु हथियारों को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई थी. जनरल द्विवेदी ने कहा कि परमाणु संबंधी बयानबाजी के बारे में मैं यह कहना चाहूंगा कि डीजीएमओ वार्ता में परमाणु पर कोई चर्चा नहीं हुई और जो भी परमाणु संबंधी बयानबाजी हुई वह पाकिस्तान के राजनेताओं या स्थानीय जनता द्वारा की गई थी। मेरे पास इस बात का कोई संकेत नहीं है कि इस तरह की कोई बात सेना की ओर से आई हो.
ट्रंप का बार-बार दावा, भारत का इनकार
डोनाल्ड ट्रंप अब तक करीब 90 बार यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को रोक दिया. मई 10 को उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा था कि वॉशिंगटन की मध्यस्थता से दोनों देशों ने पूर्ण और तत्काल युद्धविराम पर सहमति जताई. हालांकि भारत ने हर बार किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार किया है.
व्हाइट हाउस किया गया दावा
अपने दूसरे कार्यकाल के एक साल पूरे होने पर ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिर कहा कि भारत और पाकिस्तान परमाणु युद्ध के कगार पर थे और उन्होंने लाखों लोगों की जान बचाई. ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान और भारत के बीच जबरदस्त टकराव चल रहा था. आठ विमान गिरा दिए गए. मेरे विचार से वे परमाणु युद्ध छेड़ने वाले थे.
कैसे शुरू हुआ था संघर्ष
भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में आतंक के नौ ठिकानों पर कार्रवाई की थी. यह हमला 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में किया गया था, जिसमें 26 नागरिकों की मौत हुई थी.
इसके बाद पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइल हमलों की कोशिश की, जिन्हें भारतीय सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया. जवाबी कार्रवाई में भारत ने पाकिस्तान के कई एयरबेस को भारी नुकसान पहुंचाया. अंततः 10 मई को दोनों देशों के डीजीएमओ स्तर की बातचीत के बाद सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी, जिसकी पहल पाकिस्तान की ओर से की गई थी.


