किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए भारत पूरी तरह आजाद है...वेनेजुएला से ऑयल खरीद पर आया रूस का रिएक्शन
रूस ने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है. क्रेमलिन ने ट्रंप के दावे को खारिज किया कि भारत ने रूसी तेल बंद करने पर सहमति दी है. पेस्कोव और ज़खारोवा ने भारत-रूस सहयोग को लाभकारी बताया. भारत रोजाना 15 लाख बैरल रूसी तेल आयात जारी रखे हुए है.

नई दिल्लीः रूस ने स्पष्ट किया है कि भारत किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए पूरी तरह आजाद है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि हाल ही में नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच हुए एक व्यापार समझौते के तहत भारत ने रूसी तेल की खरीदारी रोकने पर सहमति जताई है. लेकिन क्रेमलिन ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि मॉस्को भारत का एकमात्र तेल आपूर्तिकर्ता नहीं है. नई दिल्ली द्वारा आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाना कोई नई बात नहीं है.
रूस का भारत पर भरोसा
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि हम और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञ अच्छी तरह जानते हैं कि रूस भारत को तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का एकमात्र स्रोत नहीं है. भारत हमेशा से दूसरे देशों से भी ये उत्पाद खरीदता रहा है. इसलिए इसमें कुछ भी नया नहीं दिखता. उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत के आपूर्तिकर्ताओं में बदलाव की प्रक्रिया पहले से चल रही है और इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है.
एक दिन पहले भी पेस्कोव ने बताया था कि रूस को भारत की ओर से रूसी तेल खरीद बंद करने के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है. रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने प्रेस ब्रीफिंग में जोर दिया कि दोनों देशों के बीच हाइड्रोकार्बन व्यापार फायदेमंद है. उन्होंने कहा कि हमें यकीन है कि भारत द्वारा रूस से हाइड्रोकार्बन खरीदना दोनों पक्षों के लिए लाभकारी है और वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है. हम भारत के साथ इस क्षेत्र में मजबूत सहयोग जारी रखने के लिए तैयार हैं."
ट्रंप का दावा
ट्रंप ने एक व्यापार समझौते की घोषणा करते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी तेल की खरीद रोककर अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से तेल खरीदने पर सहमति दिखाई है. उन्होंने अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ कम करने के साथ यह दावा किया. हालांकि, रूसी मीडिया कोमर्सेंट एफएम ने रिपोर्ट किया कि मोदी ने ऐसे किसी समझौते का जिक्र नहीं किया, जबकि ट्रंप ने इसे प्रमुखता दी.
वैश्विक डेटा के अनुसार,रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी दंडात्मक शुल्कों के बावजूद भारत रोजाना करीब 15 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल आयात कर रहा है. भारत रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है, जो उसके कुल आयात का एक तिहाई से ज्यादा हिस्सा है. विशेषज्ञों का मानना है कि रूसी तेल की मात्रा और गुणवत्ता को पूरी तरह बदलना आसान नहीं होगा, क्योंकि अमेरिकी या वेनेजुएला का तेल अलग प्रकार का है और इससे रिफाइनरी की लागत बढ़ सकती है.


