अमेरिकी हमले के डर से किलाबंदी में जुटा ईरान, परमाणु ठिकानों को भूमिगत करने की सैटेलाइट तस्वीरें सामने
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने मिडिल ईस्ट की स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हालात किसी भी समय बड़े संघर्ष में बदल सकते हैं. इसी बीच ईरान ने अपने महत्वपूर्ण सैन्य और परमाणु ठिकानों की सुरक्षा को लेकर बड़े पैमाने पर तैयारियां शुरू कर दी हैं.

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने मिडिल ईस्ट में स्तिथि को बेहद गंभीर बना दिया है. एक्सपर्ट्स का मानना है की हालत बहुत ही नाज़ुक बने हुए है और किसी भी समय दोनों देशो के बीच चल रहा है ये संघर्ष युद्ध में बदल सकता है. इसी कारण ईरान ने अपने महत्वपूर्ण सैन्य और नुक्लेअर ठिकानो की सुरक्षा बढ़ा दी और और उनकी किलाबंदी कर दी है.
सैटेलाइट से मिली ताजा तस्वीरो में सामने आया की ईरान ने अपने सभी जरुरी परमाणु ठिकानो को कंक्रीट और मिट्टी की मोटी परतों के निचे सुरक्षित कर रहा है. इन् ठिकानो को इस तरह से मजबूत बंकरों में बदला जा रहा है ताकि अगर हवाई हमले हुए तो इन्हे पर कम से कम नुकसान पहुंचे. साथ ही दोनों देशो के बीच जिनेवा में अभी भी बातचीत जारी है.
पारचिन सैन्य परिसर में तेज निर्माण गतिविधि
इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी (ISIS) के हालिया सैटेलाइट विश्लेषण के अनुसार, ईरान अपने अहम न्यूक्लियर ठिकानों को तेजी से कंक्रीट संरचनाओं और मिट्टी की परतों के नीचे छिपाने में लगा है. रिपोर्ट बताती है कि जिन ठिकानों को 2024 में इजरायल और बाद में अमेरिका ने निशाना बनाया था, वहां अब सुरक्षा ढांचे को और मजबूत किया जा रहा है.रिपोर्ट में कहा गया है, "पिछले दो से तीन हफ़्तों से ईरान पारचिन मिलिट्री कॉम्प्लेक्स में नई तालेघन 2 फैसिलिटी को मिट्टी से दबाने में व्यस्त है."
तेहरान से करीब 30 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व स्थित पारचिन सैन्य परिसर के अंदर तालेघन-2 सुविधा की 13 फरवरी की सैटेलाइट तस्वीरों में मुख्य ढांचे के चारों ओर पूर्ण कंक्रीट संरचना दिखाई दी. इसके ऊपर अब मिट्टी डाली जा रही है. ISIS के अध्यक्ष डेविड अलब्राइट ने चेतावनी दी है कि यह केंद्र जल्द ही एक “अदृश्य बंकर” में तब्दील हो सकता है, जिस पर हवाई हमलों का असर बेहद कम होगा.
रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2024 में इजरायल ने इस परिसर को निशाना बनाया था. हमले से पहले और बाद की तस्वीरों में एक आयताकार इमारत को भारी नुकसान हुआ दिखा. नवंबर 2024 से इसके पुनर्निर्माण के संकेत मिलने लगे. अक्टूबर 2025 में नई संरचना का ढांचा दिखा, नवंबर में उस पर धातु की छत जैसी संरचना नजर आई. दिसंबर तक यह आंशिक रूप से ढका हुआ था और 16 फरवरी की तस्वीरों में यह पूरी तरह मिट्टी और कंक्रीट के नीचे छिपा दिखाई दिया.
नतांज के पास सुरंगों को किया जा रहा और मजबूत
नतांज़ नुक्लेअर फैसिलिटी के समीप कोलांग-गज ला पर्वत के नीचे स्थित सुरंगों को भी मजबूत करने का काम जारी है. 10 फरवरी की तस्वीरों से संकेत मिलता है कि सुरंग के प्रवेश द्वारों पर भारी मात्रा में कंक्रीट डाला जा रहा है.
हवाई हमलों के असर को कम करने के लिए ‘ओवरबर्डन’ यानी मिट्टी और चट्टानों की अतिरिक्त परतें तैयार की जा रही हैं. यही वह क्षेत्र है जहां ईरान के दो अन्य यूरेनियम एनरिचमेंट प्लांट भी स्थित हैं. संस्थान ने कहा, "ये कोशिशें टनल के पोर्टल को मजबूत करती हैं और एयरस्ट्राइक के खिलाफ एक्स्ट्रा प्रोटेक्शन देती हैं."
ISIS के मुताबिक, सैटेलाइट तस्वीरों में पूरे कॉम्प्लेक्स में भारी निर्माण गतिविधियां देखी गईं, जिनमें डंप ट्रक, सीमेंट मिक्सर और अन्य भारी उपकरणों की आवाजाही शामिल है. पिकैक्स माउंटेन नामक इस सुविधा को लेकर ईरान की योजना स्पष्ट नहीं है. पहले इसे एक एडवांस्ड सेंट्रीफ्यूज असेंबली प्लांट के पुनर्निर्माण से जोड़ा गया था. हालांकि, इसके बड़े आकार और पहाड़ी संरचना ने इस बात को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं कि यहां और भी संवेदनशील गतिविधियां हो सकती हैं.
इस्फहान कॉम्प्लेक्स में सुरंगों के द्वार दफन
इस्फ़हान नुक्लेअर टेक्नोलॉजी सेंटर उन तीन प्रमुख ईरानी यूरेनियम-एनरिचमेंट प्लांट में शामिल है, जिन पर जून में अमेरिका ने बमबारी की थी. यह न्यूक्लियर फ्यूल साइकिल का अहम हिस्सा है. इसके अलावा यहां एक भूमिगत क्षेत्र भी है, जहां राजनयिकों के अनुसार ईरान का अधिकांश एनरिच्ड यूरेनियम संग्रहीत है.
ISIS ने 29 जनवरी को बताया कि जनवरी के अंत में ली गई तस्वीरों में दो सुरंगों के प्रवेश द्वारों को दफनाने की कोशिशें दिखाई दीं. 9 फरवरी के अपडेट में कहा गया कि तीसरे दरवाजे को भी मिट्टी से भर दिया गया है, जिससे अब सभी सुरंगों के द्वार पूरी तरह बंद हो चुके हैं. 10 फरवरी की तस्वीरों में तीनों सुरंगें मिट्टी के नीचे दबाई हुई नजर आईं.
ISIS ने कहा, "सुरंग के एंट्रेंस को वापस भरने से किसी भी संभावित एयरस्ट्राइक को कम करने में मदद मिलेगी और साथ ही स्पेशल फोर्सेज़ के रेड में जमीन तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाएगा, ताकि अंदर रखे किसी भी हाईली एनरिच्ड यूरेनियम को जब्त या नष्ट किया जा सके."
शिराज मिसाइल बेस पर पुनर्निर्माण के संकेत
एल्मा रिसर्च एंड एजुकेशन सेंटर के अनुसार, दक्षिणी ईरान में शिराज़ से करीब 10 किलोमीटर दक्षिण स्थित मिसाइल बेस उन 25 प्रमुख ठिकानों में शामिल है, जहां से मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागी जा सकती हैं. संगठन का अनुमान है कि पिछले वर्ष के संघर्ष में इस स्थल को जमीन के ऊपर हल्का नुकसान हुआ था.
3 जुलाई 2025 और 30 जनवरी को ली गई तस्वीरों की तुलना से स्पष्ट होता है कि बेस पर लॉजिस्टिक्स और संभावित कमांड कॉम्प्लेक्स में सफाई और पुनर्निर्माण कार्य जारी है. शिराज के दक्षिण स्थित इस ठिकाने पर क्षतिग्रस्त इमारतों में नई छतें डाली गई हैं और संरचनात्मक सुधार किए जा रहे हैं. वहीं कोम के उत्तर में स्थित एक अन्य बेस पर भी क्षतिग्रस्त भवन पर नई छत लगाई गई है.


