'मुल्लाओं को दफनाओ' ईरान में खामेनेई के खिलाफ भड़का प्रदर्शन, जानें कौन हैं आंदोलनकारी नेता

ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन अब धीरे-धीरे राजनीतिक विद्रोह में बदल गए हैं. प्रदर्शनकारी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ नारे लगा रहे हैं और शासन बदलने की मांग कर रहे.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: ईरान में आर्थिक संकट से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब राजनीतिक विद्रोह में बदल गए हैं. जनवरी 2026 की शुरुआत में तेहरान के बाजार से निकला यह आंदोलन पूरे देश में फैल चुका है. प्रदर्शनकारी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ नारे लगा रहे हैं और शासन बदलने की मांग कर रहे हैं. 

प्रदर्शनों की शुरुआत और फैलाव

आंदोलन की शुरुआत दिसंबर 2025 के अंत में हुई, जब तेहरान के व्यापारियों ने मुद्रा रियाल की भारी गिरावट और महंगाई के खिलाफ दुकानें बंद की. जल्द ही यह 31 प्रांतों के सैकड़ों शहरों में पहुंच गया. प्रदर्शनकारी अब पानी की कमी, बिजली कटौती और शासन की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर हैं. सुरक्षा बलों की सख्ती से टकराव बढ़ा है, जिसमें दर्जनों लोग मारे गए और हजारों गिरफ्तार हुए.

कड़े नारे और छात्रों की भूमिका

विश्वविद्यालयों में छात्र सबसे आगे हैं. तेहरान की तर्बियत मोदारेस यूनिवर्सिटी और अन्य जगहों पर छात्र नारे लगा रहे हैं: "यह कौम तब तक कौम नहीं बनेगी, जब तक मुल्लाओं को दफन नहीं किया जाता." अन्य नारे जैसे "खामेनेई मुर्दाबाद", "तानाशाह मुर्दाबाद" और "IRGC तुम हमारे ISIS हो" सुनाई दे रहे हैं. ये नारे शासन के धार्मिक नेतृत्व और एलीट फोर्स पर सीधा हमला हैं. छात्रों ने आंदोलन को और तेज करने की कसम खाई है. 

आंदोलन का कोई एक नेता नही

यह विरोध कोई संगठित राजनीतिक दल से नहीं चल रहा. इसका कोई बड़ा चेहरा नहीं है. आर्थिक शिकायतें शुरू हुई, लेकिन अब यह खामेनेई शासन के अंत की मांग तक पहुंच गया है. कुछ लोग निर्वासित शाहजादे रजा पहलवी का समर्थन कर रहे हैं और "जावीद शाह" के नारे लगा रहे हैं. 

वहीं, विदेश में बैठी नेशनल काउंसिल ऑफ रेजिस्टेंस ऑफ ईरान (NCRI) की नेता मरियम राजवी प्रदर्शनों की तारीफ कर रही हैं और शासन की क्रूरता की निंदा कर रही हैं. लेकिन अंदरूनी स्तर पर आंदोलन जनता का स्वतःस्फूर्त विद्रोह है. व्यापारी, छात्र, युवा और आम लोग शामिल हैं. 

अंतरराष्ट्रीय दबाव और भविष्य

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा हुई तो अमेरिका मदद करेगा. खामेनेई ने इसे "दंगाइयों" का काम बताया और दमन का आदेश दिया. रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि शासन "सर्वाइवल मोड" में है. क्या यह आंदोलन 2022 जैसे बड़े विद्रोह में बदलेगा या दब जाएगा, यह आने वाले दिन बताएंगे. लेकिन लोगों का गुस्सा साफ दिख रहा है कि वे अब चुप नहीं रहेंगे. 

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