क्या सच में ईरान झुक गया? अमेरिका को सौंपेगा यूरेनियम, परमाणु सपनों पर उठा बड़ा सवाल

ईरान ने अंतरराष्ट्रीय दबाव और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के आगे झुकते हुए सिद्धांत रूप से अपने हाइली एनरिच्ड यूरेनियम के पूरे भंडार को छोड़ने पर सहमति जता दी है.

Nidhi Jha
Edited By: Nidhi Jha

नई दिल्ली: महीनों से जारी भारी सैन्य तनाव और युद्ध जैसे हालातों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता में एक बेहद ऐतिहासिक और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है. ताजा रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने अंतरराष्ट्रीय दबाव और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के आगे झुकते हुए सिद्धांत रूप से अपने हाइली एनरिच्ड यूरेनियम के पूरे भंडार को छोड़ने पर सहमति जता दी है. इस कदम को मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध को समाप्त करने और वैश्विक परमाणु सुरक्षा की दिशा में एक बहुत बड़ा ब्रेकथ्रू माना जा रहा है.

कितना घातक है ईरान का यूरेनियम खजाना?

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, ईरान के पास वर्तमान में लगभग 440 किलोग्राम (970 पाउंड) अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम मौजूद है जो 60% तक शुद्ध है. सुरक्षा विशेषज्ञों और इजरायली अधिकारियों का मानना है कि परमाणु हथियार बनाने के लिए 90% शुद्धता की जरूरत होती है.

आसानी से बना सकते है घातक परमाणु बम

ईरान का यह मौजूदा भंडार तकनीकी रूप से उस सीमा के बेहद करीब है. इजरायल का दावा है कि अगर इस स्टॉक को थोड़ा और रिफाइन किया जाए तो इससे कई घातक परमाणु बम आसानी से बनाए जा सकते हैं. यही वजह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे न्यूक्लियर डस्ट कहकर संबोधित कर चुके हैं और उन्होंने साफ चेतावनी दी थी कि यदि इस भंडार को नहीं हटाया गया, तो वार्ता रद्द कर सैन्य विकल्प अपनाए जाएंगे.

क्या है समझौते की शर्तें और चुनौतियां?

ईरान ने अभी केवल एक सामान्य सहमति दी है कि वह अपना यूरेनियम सरेंडर करेगा. यह यूरेनियम किसी तीसरे देश को सौंपा जाएगा बल्कि इसे पूरी तरह नष्ट किया जाएगा या किसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसी की सख्त निगरानी में रखा जाएगा. इस जटिल प्रक्रिया पर अंतिम मुहर लगना बाकी है.

'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को दोबारा खोला गया

इस बड़ी रियायत के बदले अमेरिकी प्रशासन ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को हटाएगा और वैश्विक बैंकों में फ्रीज पड़ी ईरान की संपत्ति का एक हिस्सा जारी करेगा. इसके साथ ही पिछले कई महीनों से वैश्विक तेल बाजार के लिए सिरदर्द बने 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' जलमार्ग को भी दोबारा पूरी तरह व्यापार के लिए खोल दिया जाएगा.

सैन्य दबाव की रणनीति आई काम

ईरान इस यूरेनियम मुद्दे को शुरुआती बातचीत से बाहर रखना चाहता था लेकिन अमेरिकी वार्ताकारों ने स्पष्ट कर दिया था कि इसके बिना कोई भी शांति समझौता असंभव है. अमेरिकी सेना ने ईरान के इस्फहान परमाणु संयंत्र पर नए बंकर-बस्टर बमों से हवाई हमले की योजना भी तैयार कर ली थी जिसके बाद तेहरान को यह कड़ा फैसला लेना पड़ा. राष्ट्रपति ट्रंप ने भी सोशल मीडिया पर पुष्टि की है कि दोनों देश एक शांति समझौते के बेहद करीब हैं जिसकी आधिकारिक घोषणा जल्द ही की जा सकती है.

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