रहस्यमयी सिंकहोल्स से उजड़ती खेती, तुर्की अलर्ट पर

तुर्की का मुख्य कृषि क्षेत्र, कोन्या मैदान, इस समय ज़मीन के गंभीर संकट का सामना कर रहा है। यह इलाका, जो पहले से ही सिंकहोल से परेशान है, बिना किसी चेतावनी के अचानक ज़मीन धंसने का अनुभव कर रहा है, और स्थानीय लोगों के बीच तनाव बढ़ रहा है।

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली: तुर्की का प्रमुख कृषि क्षेत्र कोन्या मैदान इस समय गंभीर भू-संकट से गुजर रहा है. सूखे की मार झेल रहे इस इलाके में बिना किसी चेतावनी के जमीन धंस रही है और खेतों के बीच विशाल सिंकहोल बनते जा रहे हैं. ये गहरे गड्ढे न सिर्फ फसलों को निगल रहे हैं, बल्कि तुर्की के सबसे अहम गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में से एक की तस्वीर भी बदल रहे हैं.

सरकारी आकलन के अनुसार अब तक 684 सिंकहोल्स की पहचान की जा चुकी है. ड्रोन फुटेज में सामने आई तस्वीरें दिखाती हैं कि जमीन धंसने की रफ्तार कितनी तेज हो चुकी है. विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे भूगर्भीय संरचना, जलवायु परिवर्तन से बढ़ा सूखा और दशकों से जारी अत्यधिक भूजल दोहन का खतरनाक मेल जिम्मेदार है.

कोन्या क्लोज्ड बेसिन में सबसे ज्यादा खतरा

अधिकांश नए सिंकहोल्स कोन्या क्लोज्ड बेसिन में सामने आ रहे हैं. यह इलाका एक विशाल, समतल मैदान है, जिसके नीचे घुलनशील कार्बोनेट और जिप्सम चट्टानें मौजूद हैं. ये चट्टानें हजारों वर्षों में प्राकृतिक रूप से खाली गुहाएं बनाती हैं. हालिया ड्रोन सर्वेक्षणों ने साफ किया है कि इन्हीं कमजोर परतों के कारण जमीन तेजी से धंस रही है.

वैज्ञानिकों और अधिकारियों के मुताबिक, यह इलाका “karst” भू-क्षेत्र में आता है, जो स्वभाव से ही धंसाव के लिए संवेदनशील होता है. हालांकि 2000 के दशक से पहले यहां सिंकहोल्स बेहद दुर्लभ थे और दशकों में केवल गिने-चुने मामले ही दर्ज होते थे.

भूजल स्तर गिरने से कमजोर होती जमीन

विशेषज्ञ बताते हैं कि जैसे-जैसे भूमिगत जलस्तर गिरता है, चट्टानों के भीतर बनी गुहाओं की छत को सहारा मिलना बंद हो जाता है. इसके चलते खेतों में अचानक जमीन धंस जाती है और कई बार दर्जनों मीटर चौड़े गड्ढे बन जाते हैं, जबकि सतह पर पहले सब कुछ सामान्य दिखाई देता है.

इन सिंकहोल्स का आकार कई जगह इतना बड़ा है कि वे खेती योग्य जमीन को पूरी तरह बेकार कर रहे हैं.

जलवायु परिवर्तन और गहराता सूखा

सिंकहोल्स की बढ़ती संख्या को लंबे समय से चले आ रहे सूखे से जोड़ा जा रहा है, जिसे जलवायु परिवर्तन ने और गंभीर बना दिया है. सैटेलाइट आंकड़ों और राष्ट्रीय रिकॉर्ड्स के अनुसार, तुर्की के मध्य क्षेत्र में जलाशयों और भूमिगत जल भंडारों में भारी गिरावट दर्ज की गई है.

कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक 2021 तक यहां पानी का स्तर कम से कम पिछले 15 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था. बारिश की कमी के कारण भूमिगत जल भंडार दोबारा भर नहीं पा रहे हैं, जिससे जमीन के नीचे मौजूद खाली जगहों के धंसने का खतरा बढ़ गया है.

सिंचाई के लिए अत्यधिक भूजल दोहन

जलवायु संकट के साथ-साथ गन्ना, मक्का जैसी अधिक पानी मांगने वाली फसलों की खेती ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है. कोन्या बेसिन में दशकों से भूजल दोहन प्राकृतिक पुनर्भरण की क्षमता से कहीं ज्यादा हो चुका है.

अध्ययनों के अनुसार, पिछले कुछ दशकों में यहां भूजल स्तर कई जगहों पर दर्जनों मीटर नीचे चला गया है, जबकि 1970 के बाद से कुछ इलाकों में यह गिरावट 60 मीटर से भी ज्यादा बताई जा रही है.

हजारों कुएं, बढ़ता खतरा

अधिकारियों का अनुमान है कि क्षेत्र में हजारों कानूनी कुएं मौजूद हैं, जबकि अवैध कुओं की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है. ये कुएं लगातार पानी खींच रहे हैं, जिससे जमीन कमजोर हो रही है और अचानक “cover collapse” सिंकहोल्स के साथ-साथ धीरे-धीरे धंसने वाली “cover subsidence” की घटनाएं भी बढ़ रही हैं.

किसानों और बस्तियों पर मंडराता खतरा

तुर्की की आपदा प्रबंधन एजेंसी AFAD के मुताबिक, कोन्या क्लोज्ड बेसिन में अब तक कम से कम 684 सिंकहोल्स दर्ज किए जा चुके हैं. करापिनार जैसे जिलों में इनके बड़े समूह पाए गए हैं, जबकि इसका असर पड़ोसी करामान और अक्साराय क्षेत्रों तक फैल रहा है.

कई गड्ढे 30 मीटर से ज्यादा गहरे हैं, जो खेतों, सड़कों और कुछ मामलों में इमारतों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं. हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि कई किसानों को जोखिम भरे इलाकों में खेती छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है.

समाधान नहीं तो बढ़ेगी समस्या

कोन्या टेक्निकल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता सिंकहोल हॉटस्पॉट्स का नक्शा तैयार कर रहे हैं. उनका साफ कहना है कि अगर भूजल दोहन पर सख्त नियंत्रण नहीं लगाया गया और कम पानी वाली खेती की ओर बदलाव नहीं हुआ, तो तुर्की के इस कृषि हृदयस्थल में जमीन धंसने की ये घटनाएं और आम हो सकती हैं.

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