नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली गिरफ्तार, 'जेन जेड' विरोध प्रदर्शनों के दमन से जुड़ा मामला

नेपाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गैर इरादतन हत्या के एक मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है. यह गिरफ्तारी सितंबर 2025 में हुए ‘जेनरेशन जेड’ विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए हिंसक दमन से जुड़ी बताई जा रही है, जिसने उस समय देश की राजनीति को हिला कर रख दिया था.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: नेपाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. जहां एक ओर कल रैपर से राजनेता बने बालेन शाह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, वहीं एक दिन बाद ही पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को सितंबर 2025 में हुए 'जेनरेशन जेड' दंगों को रोकने में विफल रहने और गैर इरादतन हत्या के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है.

इन दंगों में करीब 19 लोगों की मौत हो गई थी और 2000 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. पूरे देश में हालात बेकाबू हो गए थे और लोगों के बीच भारी आक्रोश देखने को मिला. इसी के बाद केपी शर्मा ओली को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था.

'जेन जेड' विरोध प्रदर्शन से जुड़ा मामला

पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को शनिवार तड़के गिरफ्तार किया गया. यह मामला सितंबर 2025 में हुए ‘जेनरेशन जेड’ विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए हिंसक दमन से संबंधित है. इसी दमन के चलते उन्हें सत्ता से बेदखल होना पड़ा था.

पूर्व गृह मंत्री भी हिरासत में

इस मामले में नेपाली कांग्रेस के नेता और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी हिरासत में लिया गया है. दोनों नेताओं को भक्तपुर स्थित उनके आवासों से गिरफ्तार किया गया.

इन पर ऐसे प्रावधानों के तहत आरोप लगाए जाने की संभावना है, जिनमें अधिकतम 10 साल तक की सजा का प्रावधान है.

क्या था 'जेनरेशन जेड क्रांति'?

सितंबर 2025 में नेपाल में युवाओं के नेतृत्व में एक बड़ा आंदोलन हुआ, जिसे ‘जेनरेशन जेड क्रांति’ कहा गया. यह आंदोलन शासन की विफलताओं, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और राजनीतिक अस्थिरता के खिलाफ उभरे जनाक्रोश का परिणाम था.

शुरुआत में यह आंदोलन डिजिटल स्वतंत्रता की मांग से जुड़ा था, लेकिन जल्द ही यह व्यापक सत्ता-विरोधी आंदोलन में बदल गया, जिस पर सरकार ने सख्त कार्रवाई की.

हिंसा में 76 लोगों की मौत

सरकारी दमन के दौरान हुई हिंसा में कम से कम 76 लोगों की जान गई, जबकि 2,000 से अधिक लोग घायल हुए. यह घटना नेपाल के हालिया इतिहास की सबसे गंभीर राजनीतिक घटनाओं में गिनी जाती है.

आयोग की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई

भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए गठित एक उच्च स्तरीय आयोग ने ओली के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश की थी. इसी सिफारिश के आधार पर यह गिरफ्तारी की गई.

आयोग ने 74 वर्षीय ओली को उन घंटों तक चली गोलीबारी को रोकने में विफल रहने के लिए जिम्मेदार ठहराया, जिसमें पहले ही दिन 19 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी.

रिपोर्ट में कहा गया है, "कार्यकारी प्रमुख होने के नाते, ओली को किसी भी चीज के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, चाहे वह अच्छी हो या बुरी."

अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई की सिफारिश

ओली और रमेश लेखक के अलावा, आयोग ने तत्कालीन पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खापुंग और कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की है.

ओली ने आरोपों को बताया 'लापरवाहीपूर्ण'

ओली ने आयोग की रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है."यह रिपोर्ट अत्यंत लापरवाहीपूर्ण है, चरित्र हनन के समान है और नफरत की राजनीति को दर्शाती है. यह खेदजनक है,"

अन्नपूर्णा पोस्ट दैनिक ने अपने ऑनलाइन संस्करण में ओली के हवाले से कहा.

दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की सजा संभव

यदि आयोग की सिफारिश के अनुसार मुकदमा चलता है और अदालत उन्हें दोषी पाती है, तो ओली, रमेश लेखक और अन्य आरोपियों को अधिकतम 10 साल तक की सजा हो सकती है.

चुनाव में भी मिली हार

5 मार्च को हुए आम चुनावों में ओली को झापा-5 सीट पर राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेता बालेन शाह के हाथों हार का सामना करना पड़ा. यह क्षेत्र लंबे समय से कम्युनिस्ट पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है.

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