पाकिस्तान में लगातार तीसरे दिन कांपी धरती, रिक्टर स्केल पर 4.6 रही तीव्रता
पाकिस्तान में 4.6 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया, जो तीन दिनों में तीसरा झटका है. हालांकि नुकसान नहीं हुआ, लेकिन लगातार भूकंप से चिंता बढ़ी है. यह क्षेत्र टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव के कारण संवेदनशील माना जाता है.

इस्लामाबाद: शनिवार सुबह पाकिस्तान में लोगों की नींद उस वक्त टूट गई जब अचानक धरती हिलने लगी. भूकंप के झटकों ने कुछ सेकंड के लिए डर का माहौल बना दिया, हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी तरह के नुकसान की खबर सामने नहीं आई. फिर भी लगातार आ रहे झटकों ने लोगों की चिंता जरूर बढ़ा दी है.
पाकिस्तान में आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.6 मापी गई. आमतौर पर इस स्तर के भूकंप को ज्यादा खतरनाक नहीं माना जाता, लेकिन अगर ये बार-बार आएं तो चिंता बढ़ना स्वाभाविक है. फिलहाल किसी भी इलाके से जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है.
लगातार तीसरे दिन महसूस हुए झटके
यह पहली बार नहीं है जब हाल के दिनों में भूकंप आया हो. इससे पहले शुक्रवार को 4.5 तीव्रता का झटका महसूस किया गया था, जबकि गुरुवार को भी 4.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था. लगातार तीन दिनों तक धरती के हिलने से लोगों में दहशत का माहौल बन गया है.
क्यों बार-बार आते हैं भूकंप?
इस क्षेत्र में भूकंप आना कोई नई बात नहीं है. दरअसल अफगानिस्तान, पाकिस्तान और उत्तरी भारत एक ऐसे इलाके में स्थित हैं, जहां दो बड़ी टेक्टोनिक प्लेटें- भारतीय और यूरेशियन प्लेट आपस में टकराती हैं. इसी वजह से यहां जमीन के अंदर हलचल बनी रहती है और समय-समय पर भूकंप के झटके महसूस होते हैं.
पाकिस्तान के कौन से इलाके ज्यादा संवेदनशील
पाकिस्तान के कई हिस्से भूकंप के लिहाज से काफी संवेदनशील माने जाते हैं. बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे इलाके सक्रिय फॉल्ट लाइनों के पास स्थित हैं. गिलगित-बाल्टिस्तान भी यूरेशियन प्लेट के किनारे पर आता है, जिससे यहां जोखिम बना रहता है. वहीं पंजाब और सिंध भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं, क्योंकि ये भारतीय प्लेट के किनारे पर स्थित हैं. इन भौगोलिक स्थितियों के कारण देश में भूकंप का खतरा हमेशा बना रहता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंप को रोका नहीं जा सकता, लेकिन सतर्कता से नुकसान को कम जरूर किया जा सकता है. अगर भूकंप के झटके महसूस हों तो तुरंत खुले स्थान पर चले जाना चाहिए. किसी भी इमारत या पेड़ के नीचे खड़े होने से बचना जरूरी है.


