ईरान युद्ध के बीच कूटनीतिक कॉल में एलोन मस्क की मौजूदगी ने बढ़ाए सवाल, मोदी-ट्रंप वार्ता में शामिल होने का दावा
ईरान युद्ध के बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां एलोन मस्क कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई अहम फोन कॉल में शामिल हुए. एक निजी नागरिक की इस तरह की मौजूदगी ने कूटनीतिक प्रोटोकॉल और वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है.

नई दिल्ली: ईरान से जुड़े बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसमें दुनिया के सबसे चर्चित उद्योगपतियों में से एक एलोन मस्क की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मस्क ने अमेरिका और भारत के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई एक महत्वपूर्ण फोन कॉल में हिस्सा लिया.
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह कॉल ऐसे समय हुई जब ईरान युद्ध को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है. खास बात यह है कि इस बातचीत में एक निजी नागरिक की मौजूदगी ने कूटनीतिक प्रोटोकॉल को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
रिपोर्ट में क्या कहा गया?
मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, "एलोन मस्क ने मंगलवार को भारत के राष्ट्रपति ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर बातचीत में भाग लिया , जो युद्धकालीन संकट के दौरान दो राष्ट्राध्यक्षों के बीच हुई बातचीत में एक निजी नागरिक की असामान्य उपस्थिति थी."
इस तरह की उच्च स्तरीय बातचीत में किसी निजी व्यक्ति का शामिल होना बेहद दुर्लभ माना जाता है, खासकर तब जब चर्चा राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संकट से जुड़ी हो.
क्यों है यह कदम असामान्य?
एलोन मस्क किसी भी सरकारी पद पर नहीं हैं, ऐसे में उनका इस बातचीत में शामिल होना कई मायनों में असामान्य माना जा रहा है. आमतौर पर ऐसी बातचीत में केवल संबंधित देशों के शीर्ष अधिकारी ही शामिल होते हैं.
यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मस्क को इस कॉल में क्यों जोड़ा गया या उन्होंने बातचीत में सक्रिय भूमिका निभाई या नहीं.
मिडिल ईस्ट संकट पर रही चर्चा
रिपोर्ट के अनुसार, इस फोन कॉल का मुख्य फोकस मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर था. विशेष रूप से ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर चिंता जताई गई.
यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का परिवहन होता है.
मस्क की मौजूदगी के पीछे क्या कारण?
रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि मस्क की उपस्थिति उनके और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच संबंधों में सुधार का संकेत हो सकती है, जिनमें पिछले साल मतभेद की खबरें सामने आई थीं.
इसके अलावा, मस्क के व्यापारिक हित भी ऊर्जा, अंतरिक्ष और उभरते बाजारों से जुड़े हैं, जो इस क्षेत्र के संकट से सीधे प्रभावित हो सकते हैं.
भारत में बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं मौजूदगी
एलोन मस्क भारत में भी अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. खासतौर पर सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं जैसे प्रोजेक्ट्स के लिए उन्हें अभी नियामक मंजूरी का इंतजार है.
होर्मुज जलडमरूमध्य पर नेताओं की चिंता
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला और सुरक्षित बनाए रखने पर जोर दिया.
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बातचीत को "उपयोगी आदान-प्रदान" बताया और तनाव कम करने तथा जल्द शांति बहाली के लिए भारत के समर्थन को दोहराया.
संसद में भी उठा मुद्दा
प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की बाधा "अस्वीकार्य" है.
उन्होंने वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों और प्रमुख समुद्री मार्गों में अस्थिरता को लेकर चिंता जताई और कहा कि भारत अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा है.
राज्यसभा में उन्होंने चेतावनी दी कि यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है और ईंधन, गैस व उर्वरकों की आपूर्ति पर असर डाल रहा है.
वैश्विक बाजार पर असर
परिवहन में बाधा के चलते वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल देखा गया है. साथ ही एशिया के कुछ हिस्सों में आपूर्ति संकट की आशंका भी बढ़ गई है.
कूटनीतिक प्रोटोकॉल पर उठे सवाल
रिपोर्ट में कहा है कि राष्ट्राध्यक्षों के बीच होने वाली बातचीत में किसी आम नागरिक की भागीदारी बेहद दुर्लभ होती है, क्योंकि इनमें संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा होती है.
हालांकि, व्हाइट हाउस और भारतीय अधिकारियों ने इस कॉल के आधिकारिक विवरण में मस्क की मौजूदगी का जिक्र नहीं किया है.
व्हाइट हाउस ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जबकि एलोन मस्क ने भी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.


