ईरान युद्ध के बीच ट्रंप पर बरसे फ्रांसीसी सांसद, कहा- 'एपस्टीन का नाम आते ही, युद्ध...'
फ्रांसीसी सीनेटर क्लाउड मलहुरेट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें अस्थिर नेता बताया. उन्होंने ईरान संघर्ष में स्पष्ट रणनीति की कमी और वैश्विक तनाव बढ़ाने के आरोप लगाए, जबकि फ्रांस ने कूटनीति पर जोर दिया.

फ्रांस की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब सीनेट में एक वरिष्ठ सांसद ने अमेरिकी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला. उनका भाषण इतना सख्त था कि उसने न सिर्फ अमेरिका की विदेश नीति पर सवाल उठाए, बल्कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव को लेकर भी नई बहस छेड़ दी.
फ्रांसीसी सीनेट में बोलते हुए क्लाउड मलहुरेट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी आलोचना की. उन्होंने ट्रंप के नेतृत्व को अस्थिर बताया और आरोप लगाया कि उनके फैसलों से वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बढ़ रही है, खासकर ईरान से जुड़े संघर्ष के संदर्भ में. मलहुरेट ने कहा कि दुनिया पहले ही कई बड़े संकटों से जूझ रही है, लेकिन इस तरह के फैसले हालात को और बिगाड़ सकते हैं.
दो युद्धों की तुलना
अपने भाषण में उन्होंने 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए हमले और पश्चिम एशिया के मौजूदा तनाव के बीच समानता बताई. उनके अनुसार, दोनों ही स्थितियां शुरुआत में जल्दी खत्म होने की उम्मीद थी, लेकिन अब ये लंबे और अनिश्चित संघर्ष बन चुके हैं. उन्होंने इन हालात को “खतरनाक सोच वाले पागल नेताओं” की देन बताया, जो वैश्विक शांति के लिए खतरा बन सकते हैं.
‘महल सर्कस बन गया है’
मलहुरेट ने ट्रंप प्रशासन की कार्यशैली पर तंज कसते हुए एक तुर्की कहावत का जिक्र किया- “जब कोई जोकर महल में रहता है, तो महल सर्कस बन जाता है.” इस बयान के जरिए उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी प्रशासन में निर्णय लेने की प्रक्रिया गंभीरता से दूर होती जा रही है.
फ्रांस का अलग रुख
हालांकि फ्रांस ने इस पूरे मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाया है. फ्रांस सरकार ने साफ किया है कि वह ईरान से जुड़े किसी भी सैन्य संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल नहीं होना चाहती. फ्रांस की ओर से यह भी कहा गया है कि उनका उद्देश्य केवल रक्षात्मक तैयारी रखना है, न कि युद्ध में भाग लेना.
फ्रांसीसी अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के संघर्षों का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से ही निकल सकता है. उन्होंने कहा कि कई देश इस तनाव को लेकर चिंतित हैं और जरूरी है कि जल्द से जल्द कोई शांतिपूर्ण रास्ता निकाला जाए.
'एपस्टीन घोटाला सामने आता है तो...'
मलहुरेट ने ट्रंप की विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठाए. उनका कहना था कि ईरान से जुड़े इस संघर्ष में कोई स्पष्ट रणनीति नजर नहीं आती. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ट्रंप ने अपने कार्यकाल में कई बार अंतरराष्ट्रीय मुद्दों का इस्तेमाल निजी और घरेलू विवादों से ध्यान भटकाने के लिए किया है.
मलहुरेट ने कहा कि ट्रंप ने अपने शांति बोर्ड के गठन के बाद भी बाइडेन के पूरे कार्यकाल की तुलना में अधिक सैन्य हमले किए हैं. जब भी एपस्टीन घोटाला की बात होती है, दुनिया में कहीं न कहीं विस्फोट हो जाता है. यह ट्रंप की वैश्विक तनाव बढ़ाकर घरेलू मामलों से ध्यान भटकाने की एक रणनीति है. उन्होंने आगे कहा कि ट्रंप के 'MAGA अमेरिका' में अपने निजी हितों की पूर्ति के लिए सार्वजनिक शक्ति का इस्तेमाल किया जाता है.


