ममता के बयान पर चुनाव आयोग का एक्शन... CRPF को लेकर विवादित बातें कहने का आरोप, मांगी रिपोर्ट
पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले तनाव बढ़ गया है. चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के भाषण पर रिपोर्ट मांगी है और बासंती हिंसा मामले में एक पुलिस अधिकारी को निलंबित किया है, जबकि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं.

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, राज्य का सियासी माहौल और ज्यादा गरम होता जा रहा है. एक तरफ चुनावी रैलियां तेज हो गई हैं, तो दूसरी ओर हिंसा और आरोप-प्रत्यारोप ने तनाव बढ़ा दिया है. इसी बीच भारत निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए कई अहम कदम उठाए हैं. चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के एक हालिया भाषण को लेकर रिपोर्ट मांगी है. यह भाषण दार्जिलिंग के नक्सलबाड़ी क्षेत्र में एक जनसभा के दौरान दिया गया था.
आयोग का कहना है कि भाषण के वीडियो में ममता बनर्जी कथित तौर पर सुरक्षा बलों, खासकर सीआरपीएफ, को लेकर विवादित बातें कहती नजर आ रही हैं. साथ ही उन्होंने महिलाओं से मतदान केंद्रों पर मौजूद रहने और जरूरत पड़ने पर अपने बचाव के लिए घरेलू सामान का इस्तेमाल करने की बात कही थी. इस मामले को गंभीर मानते हुए आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से पूरी घटना की विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है. आयोग यह जानना चाहता है कि भाषण में कही गई बातें चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करती हैं या नहीं.
हिंसा के बाद पुलिस अधिकारी पर कार्रवाई
इसी बीच दक्षिण 24 परगना जिले के बासंती इलाके में हुई हिंसा के बाद चुनाव आयोग ने कड़ा कदम उठाया है. बासंती थाने के प्रभारी इंस्पेक्टर अविजित पॉल को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. यह कार्रवाई उस घटना के बाद हुई, जिसमें चुनाव प्रचार के दौरान हिंसा भड़क गई थी और पुलिसकर्मियों सहित कई लोग घायल हो गए थे.
आयोग के अनुसार, पुलिस अधिकारी को पहले से ही संभावित तनाव की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए. यहां तक कि केंद्रीय सुरक्षा बल उपलब्ध होने के बावजूद उनकी मदद नहीं ली गई. आयोग ने इसे ड्यूटी में गंभीर लापरवाही माना है.
भाजपा का टीएमसी पर हमला
इस घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. भाजपा नेता बिप्लब कुमार देब ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं पर सुनियोजित तरीके से हमला किया गया और जब पुलिस ने हस्तक्षेप करने की कोशिश की, तो उन पर भी हमला हुआ. भाजपा का आरोप है कि राज्य में हिंसा का माहौल सरकार की नीतियों का परिणाम है.
चुनाव की तारीखें और बढ़ता तनाव
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में होने वाले हैं. पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा चरण 29 अप्रैल को होगा. मतगणना 4 मई को तय की गई है. जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे राज्य में राजनीतिक गतिविधियां और तनाव दोनों बढ़ते जा रहे हैं.


