No NATO, आर्मी में कटौती और जीते हुए इलाकों से सेना की वापसी...क्या जेलेंस्की मानेंगे ट्रंप का 28 सूत्रीय शांति प्रस्ताव?
अमेरिका की नई शांति योजना में यूक्रेन से भूमि छोड़ने, सेना सीमित करने और NATO विस्तार रोकने जैसी रियायतों की मांग शामिल है, जिससे कीव और यूरोप में चिंता बढ़ी है. युद्ध, राजनीतिक संकट और अमेरिकी दबाव के बीच ज़ेलेंस्की इस पर विचार कर रहे हैं.

नई दिल्लीः यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका ने एक नई और विवादास्पद शांति योजना का मसौदा पेश किया है. लगभग चार साल से जारी युद्ध लगातार बढ़ती सैन्य चुनौतियों और राजनीतिक तनाव के बीच यह प्रस्ताव कीव के लिए एक नई दुविधा लेकर आया है. साथ ही यूरोपीय देशों में भी इस मसौदे को लेकर चिंता गहरा रही है.
अमेरिकी प्रस्ताव में रियायतों की मांग
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका की इस योजना में यूक्रेन से रूस को कुछ भूमि सौंपने की मांग की गई है. इसके अलावा यूक्रेन की सेना के आकार को सीमित करने का सुझाव भी शामिल है. इतना ही नहीं, प्रस्ताव में भविष्य में NATO के विस्तार पर रोक लगाने का इशारा भी है, जो मॉस्को के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है.
इस योजना में यह भी कहा गया है कि यूक्रेन के पुनर्निर्माण के लिए रूस की फ्रीज की गई लगभग 100 बिलियन डॉलर की विदेशी संपत्तियों का इस्तेमाल किया जाएगा. साथ ही रूस को धीरे-धीरे वैश्विक आर्थिक प्रणाली में वापस लाने का रास्ता खोला जाएगा, जिसमें उसके खिलाफ लगे प्रतिबंधों में ढील भी शामिल हो सकती है. अगर यह योजना लागू होती है, तो पुतिन को एक बार फिर G8 जैसे प्रमुख आर्थिक समूह में शामिल होने का मौका मिल सकता है.
जेलेंस्की पर बढ़ा दबाव
अमेरिका ने यह मसौदा औपचारिक रूप से यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की को सौंप दिया है. यह 28-बिंदुओं वाला एक विस्तृत दस्तावेज है, जिसे यूक्रेन की भागीदारी के बिना तैयार किया गया है. यही कारण है कि कीव और यूरोपीय नेता दोनों इस प्रस्ताव को लेकर असहज हैं.
फिर भी जेलेंस्की ने इसे तुरंत अस्वीकार नहीं किया है. वे आने वाले दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ इस प्रस्ताव पर सीधी बातचीत करेंगे. चूंकि यूक्रेन सैन्य और आर्थिक मदद के लिए भारी मात्रा में अमेरिका पर निर्भर है, इसलिए इस वार्ता को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
कीव में अमेरिकी सैन्य प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद ज़ेलेंस्की ने कहा कि वे इस प्रस्ताव पर रचनात्मक, ईमानदार और तेज संवाद के लिए तैयार हैं. उनके कार्यालय ने भी पुष्टि की कि उनका लक्ष्य अमेरिका और यूरोपीय सहयोगियों के साथ मिलकर एक न्यायपूर्ण शांति सुनिश्चित करना है.
यूरोपीय देशों की सशंकित प्रतिक्रिया
अमेरिका की इस पहल को यूरोप ने संतुलित प्रतिक्रिया दी है, लेकिन उनकी बेचैनी स्पष्ट है. फ्रांस ने कहा कि शांति का मतलब आत्मसमर्पण नहीं हो सकता. वहीं यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने सवाल उठाया कि क्या रूस पर समानांतर दबाव डाला भी जा रहा है या नहीं.
यूरोपीय नेताओं का कहना है कि एकतरफा रियायतें देकर शांति कायम नहीं की जा सकती, खासकर तब, जब रूस की ओर से कोई ठोस प्रतिबद्धता सामने न आए.
यूक्रेन की बदलती जमीन
अमेरिकी कूटनीति ऐसे समय सामने आई है जब यूक्रेन युद्ध के मैदान में कठिन परिस्थितियों से जूझ रहा है. रूसी सेना पोक्रोव्स्क की दिशा में बढ़त हासिल कर रही है और बुनियादी ढांचे पर हमले तेज़ हो गए हैं. साथ ही यूक्रेन में राजनीतिक अशांति भी बढ़ रही है. हाल ही में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते दो मंत्रियों की बर्खास्तगी के बाद विपक्ष सरकार पर और अधिक दबाव बना रहा है.
अमेरिका का पक्ष
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस प्रस्ताव का बचाव करते हुए कहा कि दीर्घकालिक शांति स्थापित करने के लिए कठिन और व्यावहारिक निर्णय लेने जरूरी हैं. उनके अनुसार, दोनों पक्षों को समझौते की राह पर आगे बढ़ना ही होगा.


