आर्थिक संकट से घिरा पाकिस्तान, खर्च कटौती के बीच रद्द करनी पड़ी पाकिस्तान डे की सैन्य परेड
पाकिस्तान सरकार ने आर्थिक दबाव और खर्च कटौती के कारण 23 मार्च को होने वाली पाकिस्तान डे सैन्य परेड रद्द कर दी है। सरकार ने कहा कि इस बार समारोह सादगी से मनाया जाएगा।

पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को लेकर एक बड़ा संकेत सामने आया है। सरकार ने 23 मार्च को होने वाली पाकिस्तान डे सैन्य परेड रद्द कर दी है। यह परेड हर साल बड़े स्तर पर आयोजित की जाती थी। इसमें सेना की ताकत और हथियारों का प्रदर्शन किया जाता था। लेकिन इस बार सरकार ने खर्च कम करने का फैसला लिया है। मौजूदा हालात को देखते हुए कार्यक्रम को सीमित किया गया है। अब राष्ट्रीय दिवस केवल साधारण समारोह के साथ मनाया जाएगा।
क्या सादगी से मनाया जाएगा दिवस
सरकार ने बयान जारी कर बताया कि इस साल पाकिस्तान डे को सादगी से मनाया जाएगा। परेड और बड़े औपचारिक कार्यक्रम नहीं होंगे। इसके बजाय केवल ध्वजारोहण और सीमित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सभी मंत्रालयों और सरकारी विभागों को निर्देश दिए गए हैं। उनसे कहा गया है कि समारोह को सादगी और गंभीरता के साथ मनाया जाए। सरकार का कहना है कि यह कदम खर्च में कटौती के व्यापक अभियान का हिस्सा है।
क्या तेल संकट का पड़ा असर
पाकिस्तान सरकार ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में तेल संकट का असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने से आयात खर्च बढ़ गया है। इससे सरकार पर वित्तीय दबाव भी बढ़ा है। ऐसे हालात में बड़े सरकारी कार्यक्रमों पर खर्च कम करना जरूरी समझा गया। इसी वजह से सैन्य परेड को रद्द करने का फैसला लिया गया। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय हित को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
क्या आर्थिक दबाव का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि इतना बड़ा सैन्य समारोह रद्द होना गंभीर आर्थिक संकट का संकेत है। आमतौर पर ऐसे कार्यक्रम किसी देश की शक्ति का प्रदर्शन होते हैं। लेकिन जब इन्हें रोकना पड़े तो यह वित्तीय दबाव को दिखाता है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण हो गई है। विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बना हुआ है। इसी वजह से सरकार को सख्त फैसले लेने पड़ रहे हैं।
क्या सरकार ने उठाए सख्त कदम
शहबाज शरीफ सरकार ने हाल ही में कई खर्च कटौती के कदम उठाए हैं। सरकारी संस्थानों में कर्मचारियों के वेतन में कटौती की गई है। कुछ मामलों में यह कटौती 5 से 30 प्रतिशत तक बताई जा रही है। इसके अलावा सरकारी वाहनों के इस्तेमाल को भी सीमित किया गया है। मंत्रियों और अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर भी रोक लगाई गई है। इन उपायों का उद्देश्य सरकारी खर्च को कम करना बताया गया है।
क्या ईंधन संकट से बढ़ी मुश्किल
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भी पाकिस्तान पर पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हालात तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं। इससे ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। आयात पर निर्भर पाकिस्तान के लिए यह स्थिति और मुश्किल पैदा कर रही है। इसलिए सरकार को आर्थिक प्रबंधन के लिए नए कदम उठाने पड़ रहे हैं।
क्या सामने आई पुरानी कमजोरियां
विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा संकट ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की कई कमजोरियों को उजागर कर दिया है। देश की अर्थव्यवस्था काफी हद तक आयात पर निर्भर है। विदेशी मुद्रा भंडार सीमित है और कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। ऐसे हालात में बड़े सरकारी कार्यक्रमों पर खर्च करना मुश्किल हो गया है। पाकिस्तान डे की सैन्य परेड रद्द होना इसी स्थिति का संकेत माना जा रहा है।


