फ्रांस में डिजिटल आग, सोशल मीडिया से शुरू हुआ आंदोलन सड़कों पर हिंसा बन गया

फ्रांस में सोशल मीडिया पर शुरू हुआ 'ब्लॉक एव्रीथिंग मूवमेंट' देखते ही देखते सड़कों पर हिंसा में बदल गया। राजधानी पेरिस में हजारों लोग उतर आए, आगजनी हुई, पुलिस से झड़पें हुईं और 200 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

International News: फ्रांस में जिस आंदोलन ने सड़कों पर आग लगाई, उसकी शुरुआत इंटरनेट से हुई। ट्विटर और फेसबुक पर 'ब्लॉक एव्रीथिंग' कैंपेन चलाया गया। धीरे-धीरे यह ट्रेंड पूरे देश में फैल गया। युवा गुस्से में भरकर सड़कों पर आ गए। उन्होंने कहा कि सरकार उनकी आवाज नहीं सुन रही। इस आंदोलन का नारा था कि सब कुछ बंद कर दो। इसके बाद दुकानों, बसों और ट्रेनों को निशाना बनाया गया। सोशल मीडिया से उठी यह चिंगारी धीरे-धीरे हिंसा की लपटों में बदल गई।

पेरिस में सड़कें जाम

जैसे ही आंदोलनकारियों ने राजधानी पेरिस में प्रवेश किया, पूरा शहर रुक गया। हजारों लोग एक साथ सड़क पर उतर आए। जगह-जगह बैरिकेड तोड़े गए और टायर जलाए गए। प्रदर्शनकारियों ने कई चौराहों को बंद कर दिया। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए आंसू गैस छोड़ी। लेकिन गुस्से में भरे प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे। शहर का माहौल युद्ध जैसा हो गया। दुकानदारों ने डर के कारण शटर गिरा दिए। लोग घरों में कैद होकर टीवी और मोबाइल से हालात देख रहे थे। पेरिस पहली बार इतना असुरक्षित दिख रहा था।

पुलिस का कड़ा एक्शन

स्थिति बिगड़ते ही सरकार ने राजधानी को छावनी में बदल दिया। करीब 80 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए वाटर कैनन और डंडों का इस्तेमाल किया। 200 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार हुए लोगों में से ज्यादातर युवा थे। आंतरिक मंत्री ने कहा कि प्रदर्शनकारी शहर को बंद करने में नाकाम रहे। लेकिन आंदोलनकारियों का दावा था कि उन्होंने सरकार को हिला दिया है। देर रात तक पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प जारी रही। पेरिस का आकाश धुएं और आंसू गैस से भर गया।

राजधानी से बाहर फैली आग

यह बवाल केवल पेरिस तक सीमित नहीं रहा। पश्चिमी शहर रेन में एक बस जलाई गई। इसके कारण बिजली चली गई और ट्रेनें रुक गईं। लियोन और मार्से में भी आगजनी और हिंसा हुई। कई जगहों पर सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। फायर ब्रिगेड को जगह-जगह आग बुझाने में घंटों लगे। लोगों ने कहा कि माहौल डरावना हो गया है। बच्चे स्कूल नहीं जा सके और बाजार बंद हो गए। आंदोलन अब पूरे फ्रांस में फैलने का खतरा पैदा कर रहा है।

हिंसा की वजह क्या

इस पूरी बगावत की जड़ प्रधानमंत्री बायरू का बजट था। उन्होंने 44 अरब यूरो बचाने का प्रस्ताव रखा था। लोगों को लगा कि यह आम जनता के खिलाफ है। सोशल मीडिया पर तुरंत इसका विरोध शुरू हो गया। विरोध इतना बढ़ा कि प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रक्षा मंत्री लेकोर्नू को नया प्रधानमंत्री बना दिया। लेकिन जनता को यह फैसला भी पसंद नहीं आया। उन्होंने कहा कि सरकार केवल चेहरा बदल रही है, नीतियां वही हैं। यही वजह है कि गुस्सा और भड़क गया।

मैक्रों पर संकट गहराया

राष्ट्रपति मैक्रों पर अब तक का सबसे बड़ा दबाव है। जनता कह रही है कि वह अमीरों के हित में फैसले लेते हैं। विपक्ष ने भी उनका विरोध शुरू कर दिया है। विपक्षी नेता चुनाव की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने साफ कह दिया है कि जब तक बदलाव नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा। विश्लेषकों का मानना है कि यह संकट मैक्रों की साख को हिला सकता है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी इसे फ्रांस का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट बता रही है।

फ्रांस खड़ा है दोराहे पर

आज फ्रांस एक बड़े दोराहे पर खड़ा है। जनता चाहती है कि उनकी आवाज सुनी जाए। दूसरी ओर सरकार अपनी नीतियों पर अड़ी हुई है। सड़कों पर हिंसा यह दिखाती है कि जनता और सत्ता में दूरी बढ़ गई है। अगर सरकार ने बातचीत नहीं की तो हालात और बिगड़ सकते हैं। फिलहाल पेरिस और अन्य शहर आग की लपटों में घिरे हुए हैं। पूरी दुनिया देख रही है कि फ्रांस किस रास्ते पर जाएगा। यह संकट केवल राजनीतिक नहीं बल्कि लोकतंत्र की परीक्षा भी बन गया है।

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