इजराइल के खिलाफ मिसाइल हमले की तैयारी, ईरान ने चीन से की बारूद डील

ईरान ने इजराइली हमलों की आशंका के बीच चीन से अमोनियम परक्लोरेट पाउडर का बड़ा सौदा किया है. यह रसायन बैलिस्टिक मिसाइल निर्माण में अहम भूमिका निभाता है. ईरान 800 मिसाइलें बनाने की तैयारी में है, जिससे इजराइल और अमेरिका की सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं.

Dimple Yadav
Edited By: Dimple Yadav

ईरान ने अपने न्यूक्लियर ठिकानों पर इजराइल के संभावित हमले को भांपते हुए एक बड़ा सैन्य कदम उठाया है. उसने चीन के साथ एक संवेदनशील डील की है, जिसके तहत चीन ईरान को अमोनियम परक्लोरेट पाउडर (Ammonium Perchlorate Powder) की सप्लाई करेगा. इस पाउडर का उपयोग बैलिस्टिक मिसाइलों के निर्माण में किया जाता है और इसका इस्तेमाल इजराइल के खिलाफ अटैक के लिए किया जाएगा.

अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ईरान चीन से यह पाउडर 800 बैलिस्टिक मिसाइलें बनाने के लिए मंगवा रहा है. अगले महीने यह खेप ईरान पहुंच जाएगी, जिसके बाद वहां के वैज्ञानिक और तकनीशियन मिसाइल निर्माण शुरू करेंगे. इस खबर से इजराइल और अमेरिका की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि ईरान पहले ही 3000 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलों का मालिक है. हाल ही में ईरान ने एक वीडियो जारी कर अपनी मिसाइल ताकत का प्रदर्शन भी किया था.

क्या है अमोनियम परक्लोरेट पाउडर?

अमोनियम परक्लोरेट का रासायनिक सूत्र NH₄ClO₄ है. यह सफेद, क्रिस्टलीय और पानी में घुलनशील पाउडर एक शक्तिशाली ऑक्सीडाइज़र होता है. मिसाइलों और रॉकेटों में यह ईंधन के साथ मिलकर ऑक्सीजन सप्लाई करता है, जिससे दहन संभव होता है. इस रसायन के बिना मिसाइल का सफल प्रक्षेपण संभव नहीं है. यही कारण है कि इसकी आपूर्ति किसी भी देश की मिसाइल क्षमता को मजबूत बना सकती है.

हूती विद्रोहियों को भी मिल सकती हैं मिसाइलें

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ईरान इन 800 में से कुछ मिसाइलें यमन के हूती विद्रोहियों को सौंप सकता है. हूती विद्रोही पहले ही इजराइल के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं और हाल ही में उन्होंने तेल अवीव पर मिसाइल अटैक भी किया है. अमेरिका के साथ भी हूती विद्रोहियों की तनातनी जारी है.

संकट में पश्चिम एशिया की शांति

हिजबुल्लाह और हमास जैसे संगठन इजराइल के जवाबी हमलों के चलते कमजोर हो चुके हैं. ऐसे में हूती विद्रोही इजराइल के खिलाफ सक्रिय अकेला बड़ा समूह बनकर उभरे हैं. ईरान की यह डील क्षेत्रीय असंतुलन को और बढ़ा सकती है. चीन की भूमिका पर भी वैश्विक शक्तियों की नजर है क्योंकि यह आपूर्ति अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को प्रभावित कर सकती है.

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