अमेरिकी ठिकानों पर हमले से पहले रूस ने ईरान को दी खुफिया जानकारी? जेलेंस्की ने किया सनसनीखेज दावा

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने आरोप लगाया है कि रूस ने सऊदी अरब में अमेरिकी बेस पर हमले से पहले ईरान को खुफिया जानकारी दी. हालांकि इन दावों के समर्थन में अभी तक कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है.

Shraddha Mishra

कीव: मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच अब एक नया और चौंकाने वाला दावा सामने आया है, जिसने वैश्विक राजनीति को और उलझा दिया है. वलोडिमिर जेलेंस्की ने आरोप लगाया है कि ईरान के हमले से पहले रूस ने उसे खुफिया जानकारी मुहैया कराई थी. यह दावा अगर सही साबित होता है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय समीकरणों में बड़ा बदलाव आ सकता है.

जेलेंस्की ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि रूस ने ईरान की मदद की. उनके मुताबिक, यह सहयोग सिर्फ सामान्य नहीं, बल्कि पूरी तरह से सुनियोजित था. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि रूस के लिए ईरान को समर्थन देना रणनीतिक रूप से फायदेमंद है, खासकर ऐसे समय में जब दोनों देश अलग-अलग मोर्चों पर अमेरिका और उसके सहयोगियों का सामना कर रहे हैं.

उपग्रह तस्वीरों से जुड़े दावे

यूक्रेन की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, रूस के सैटेलाइट्स ने सऊदी अरब स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस की कई बार तस्वीरें ली थीं. बताया गया कि 20, 23 और 25 मार्च को लगातार इस इलाके की निगरानी की गई और इसके ठीक बाद 26 मार्च को ईरान ने इस बेस पर हमला किया. इस हमले में कई अमेरिकी सैनिक घायल हुए थे. जेलेंस्की का कहना है कि इस तरह बार-बार निगरानी करना किसी बड़े हमले की तैयारी का संकेत होता है.

दावों पर सवाल भी

हालांकि, इन आरोपों को लेकर अभी तक कोई ठोस और स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है. यूक्रेन ने जो जानकारी साझा की है, उसमें प्रत्यक्ष सबूत या तस्वीरें सार्वजनिक नहीं की गई हैं. दूसरी ओर, सर्गेई लावरोव पहले ही इस तरह के आरोपों को खारिज कर चुके हैं. उन्होंने यह जरूर स्वीकार किया कि रूस और ईरान के बीच सैन्य सहयोग है, लेकिन खुफिया जानकारी साझा करने से इनकार किया है.

समर्थन जुटाने की कोशिश

जेलेंस्की इन आरोपों के साथ-साथ खाड़ी देशों से समर्थन हासिल करने की कोशिश भी कर रहे हैं. वे सऊदी अरब और कतर जैसे देशों के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन अपने अनुभव, खासकर ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम से जुड़ी जानकारी, इन देशों के साथ साझा करने को तैयार है.

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने यह भी चिंता जताई कि अगर मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ता है, तो अमेरिका का ध्यान और संसाधन यूक्रेन से हट सकते हैं. उनका मानना है कि यूक्रेन की सुरक्षा के लिए पश्चिमी देशों का लगातार समर्थन बेहद जरूरी है, और इसमें किसी तरह की कमी उनके लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है.

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