यमराज और डूम्सडे विमान की तैनाती, क्या दुनिया देखेगी नई शीत युद्ध की लहर?

रूस और अमेरिका के बीच वेनेजुएला को लेकर परमाणु युद्ध का खतरा बढ़ गया है, क्योंकि अमेरिका ने रूसी तेल टैंकर Bella-1 को जब्त कर लिया है और रूस ने इसके जवाब में परमाणु पनडुब्बी तैनात की है. इस तनाव से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ने की संभावना है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

2026 में रूस और अमेरिका के बीच परमाणु युद्ध का खतरा काफी बढ़ गया है. दोनों महाशक्तियाँ अपने परमाणु हथियारों और आधुनिक शस्त्रों के साथ आमने-सामने हैं. पिछले कुछ महीनों से दोनों देशों के बीच कड़े जुबानी टकराव और परमाणु डायलॉग तेज हो गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता का माहौल बन गया है. 

परमाणु हमले की धमकी 

रूस के राष्ट्रपति पुतिन के करीबी सहयोगी एलेक्सी जुरालेव ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए टॉरपीडो और परमाणु हमले तक की धमकी दी है. अमेरिका ने भी जवाबी कार्रवाई की है. अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि पूरे पश्चिमी गोलार्ध को अमेरिका की सुरक्षा में रखा जाएगा और वेनेजुएला को विरोधी देशों के ऑपरेटिंग हब बनने से रोका जाएगा. इस तनाव का केंद्र वेनेजुएला है, जहां अमेरिकी सेना ने रूसी तेल टैंकर को कब्जे में ले लिया. इस टैंकर से चीन और रूस को भारी मात्रा में कच्चा तेल सप्लाई हो रहा था. अमेरिका का दावा है कि यह टैंकर प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था.

रूस ने अपने तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए वेनेजुएला के पास परमाणु पनडुब्बी और युद्धपोत तैनात किए हैं. इनमें सबसे चर्चा का केंद्र परमाणु पनडुब्बी BS-329 बेलगोरोद है, जिसे ‘यमराज’ कहा जाता है. यह पनडुब्बी दुनिया की सबसे लंबी और शक्तिशाली मानी जाती है और इसमें 100 मेगाटन न्यूक्लियर पेलोड व सुपर टॉरपीडो पोसाइडन ले जाने की क्षमता है. रूस का दावा है कि यह पनडुब्बी समुद्र के नीचे 500 मीटर ऊंची रेडियोएक्टिव सुनामी उत्पन्न कर सकती है. इसका मुकाबला किसी भी देश के पास नहीं है.

ट्रंप ने डूम्सडे विमान बोइंग E-4B Nightwatch किया सक्रिय 

अमेरिका ने भी अपने बचाव की तैयारी तेज कर दी है. राष्ट्रपति ट्रंप ने डूम्सडे विमान बोइंग E-4B Nightwatch को सक्रिय किया है. यह विमान परमाणु युद्ध के दौरान हवाई कमांड सेंटर का काम करता है और इसे किसी भी स्थिति में न्यूक्लियर कम्युनिकेशन बनाए रखने के लिए डिजाइन किया गया है.

परमाणु तनाव का प्रमुख कारण रूसी तेल टैंकर Bella-1 का अमेरिका द्वारा जब्त होना है. यह टैंकर वेनेजुएला से तेल लेकर चीन जा रहा था. इसके अलावा, अमेरिका ने M/T सोफिया टैंकर पर भी नियंत्रण स्थापित किया है. ब्रिटेन ने इस ऑपरेशन में अमेरिका को इंटेल और लॉजिस्टिक सहायता दी. इस कार्रवाई से रूस और चीन के तेल व्यापार को भी गंभीर चोट लगी है.

अमेरिका और रूस के बीच यह टकराव अटलांटिक महासागर में परमाणु युद्ध के खतरे को बढ़ा रहा है. दोनों देश अपनी सैन्य शक्ति और रणनीतिक हथियारों के माध्यम से एक-दूसरे को दबाव में रखने की कोशिश कर रहे हैं. इस तनाव का केंद्र तेल और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का खेल बन चुका है, जो किसी भी समय बड़े संकट का कारण बन सकता है.

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