अलीया रोजा का बड़ा खुलासा: कैसे जासूस बनाते हैं सिलिकॉन वैली के प्रोफेशनल्स लोगों को निशाना?

अमेरिका में रहने वाली अलीया रोजा ने एक इंटरव्यू में अपनी पुरानी जिंदगी का राज खोला. उन्होने कहा कि वो कभी रूस की खतरनाक 'सेक्स स्पाई' हुआ करती थीं.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली: अमेरिका में रह रही एक पूर्व रूसी एजेंट ने अपने जासूसी करियर से जुड़े चौंकाने वाले राज खोले हैं. उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें और उनकी साथी 'सेक्स स्पाइज' को अपने टारगेट को बहकाने और उनसे गोपनीय जानकारियां निकलवाने की ट्रेनिंग दी जाती थी. अलिया रोजा नाम की इस पूर्व जासूस ने मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहा कि जब वह एक 'इंटेलिजेंस टारगेट' से प्यार कर बैठीं, तो उन्हें अपने देश से निकाल दिया गया.

कैसे होती थी जासूसों की ट्रेनिंग?

रोजाने बताया कि उन्हें बचपन से ही स्पाई बनने की ट्रेनिंग दी गई थी. इस दौरान उन्हें यह सिखाया गया कि किसी व्यक्ति के करीब कैसे जाना है, उसकी भावनाओं को कैसे समझना है और फिर उसका उपयोग जानकारी हासिल करने में कैसे करना है. वे अपने टारगेट को देखते हैं, उनसे जानकारी चाहिए होती है. वे उसकी भावनाओं और कमजोरियों को भांपते हैं और फिर उन्हें उसी के जरिए manipulate करते हैं.

प्यार के जाल में फंसाने का तरीका

अलिया रोजा के अनुसार, जासूस सीधे अपने शिकार से संपर्क नहीं करते, बल्कि पहले धीरे-धीरे उसकी जिंदगी में घुल जाते हैं. आप पहले उनके जीवन में सात बार दिखते हैं. कभी कॉफी शॉप में, कभी जिम में या सोशल मीडिया पर लाइक्स के जरिए. जब आप उनसे आखिरकार मिलते हैं, तब तक उनका दिमाग आपको पहले से भरोसा करने लगता है, उन्होंने बताया.

इसके बाद आता है 'लव बॉम्बिंग' का चरण, जहां एजेंट अपने टारगेट को भावनात्मक रूप से फंसा लेते हैं. वे खूब तारीफें करते हैं, सेल्फी और बिकिनी फोटो भेजते हैं. वे कमजोर या अकेले होने का नाटक करते हैं. जैसे ‘मेरे माता-पिता नहीं रहे’, ‘मैं गरीब हूं’, ‘मैं अकेली हूं’. इससे सामने वाला खुद को हीरो समझने लगता है, रोजा ने ये सब बताया.

भरोसा बनने के बाद शुरू होती है मानसिक चालबाजी

जब टारगेट पूरी तरह भावनात्मक रूप से जुड़ जाता है, तो जासूस उसके आत्मविश्वास पर हमला करते हैं. एजेंट कहेगा ‘तुम्हारा बॉस तुम्हारी कद्र नहीं करता’, ‘तुम्हारे दोस्त तुम्हारा इस्तेमाल करते हैं.’ इससे पीड़ित को लगता है कि वही उसे समझती है और बाकी दुनिया गलत है. इसके बाद जब भावनात्मक रिश्ता मजबूत हो जाता है, तब एजेंट असली मकसद सामने रखता है. जरूरी जानकारी की मांग. वे डर पैदा करते हैं. ‘अगर तुमने ये जानकारी नहीं दी, तो मैं हमेशा के लिए चली जाऊंगी.’ और इसी भावनात्मक दबाव में लोग वो बातें बता देते हैं जो वे सामान्य रूप से कभी नहीं बताते, उन्होंने बताया.

 टेक प्रोफेशनल्स क्यों बनते हैं आसान शिकार?

रोजा ने बताया कि टेक इंडस्ट्री से जुड़े लोग, खासकर सिलिकॉन वैली प्रोफेशनल्स, जासूसों के लिए आसान निशाने होते हैं. वे बहुत बुद्धिमान होते हैं, लेकिन अधिकतर समय ऑफिस में बिताते हैं. महिलाओं से उनका इंटरैक्शन कम होता है. ऐसे में अगर कोई महिला अचानक दिलचस्पी दिखाती है, तो वे जल्दी प्रभावित हो जाते हैं, उन्होंने चेताया. रोजा ने यह भी कहा कि उन्होंने कभी अमेरिका में कोई मिशन नहीं चलाया और उनके अधिकतर ऑपरेशन ब्रिटेन और यूरोप में हुए. उन्हें 2020 में अमेरिकी ग्रीन कार्ड मिला था.

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