अफगानिस्तान में पत्नियों को पीटने की तालिबान ने दी खुली आजादी, मारने का भी बताया तरीका
अफगानिस्तान में तालिबान ने एक नया कानून लागू किया है. इस कानून के तहत अब पति अपनी पत्नियों या बच्चों को पीट सकता है, लेकिन अगर इससे हड्डियां टूटें या खुले घाव हों तो अपराध माना जाएगा अन्यथा यह मारना अपराध में नहीं जोड़ा जाएगा.

नई दिल्ली: तालिबान ने अफगानिस्तान में एक नया आपराधिक कानून लागू किया है, जिसे उनके सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने जनवरी 2026 में हस्ताक्षर किए. यह लगभग 90 पृष्ठों का दस्तावेज है, जिसमें घरेलू हिंसा को सीमित रूप से वैध ठहराया गया है. कानून के अनुसार, पति अपनी पत्नी या बच्चों को शारीरिक सजा दे सकता है, लेकिन अगर इससे हड्डियां टूटें या खुले घाव हों, तो ही इसे गंभीर अपराध माना जाएगा.
ऐसे मामलों में दोषी पति को अधिकतम 15 दिनों की जेल हो सकती है. सामान्य मारपीट या चोटें, जो दिखाई न दें या गंभीर न हों, उसपर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होगी.
महिलाओं के लिए न्याय की राह में बाधाएं
महिलाओं के लिए दुर्व्यवहार साबित करना बेहद कठिन बना दिया गया है. पीड़ित महिला को अदालत में अपनी चोटें दिखानी पड़ती हैं, लेकिन वह पूरी तरह बुर्के में ढकी रहनी चाहिए. साथ ही, उसके साथ पति या कोई पुरुष अभिभावक (महरम) का होना जरूरी है.
यह व्यवस्था महिलाओं को न्याय मांगने से रोकती है, क्योंकि वे अकेले या बिना पुरुष साथी के अदालत नहीं जा सकती. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह नियम हिंसा को बढ़ावा देता है और पीड़ितों पर अतिरिक्त बोझ डालता है.
महिलाओं की स्वतंत्रता पर पाबंदी
यह कानून महिलाओं की आवाजाही को भी सख्ती से नियंत्रित करता है. अगर कोई विवाहित महिला बिना पति की अनुमति के रिश्तेदारों से मिलने जाती है या उनके घर ठहरती है, तो उसे तीन महीने तक की जेल की सजा हो सकती है. तालिबान के शरिया कानून की सख्त व्याख्या के तहत महिलाओं को पहले से ही कई प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है.
2021 से बढ़ती महिला विरोधी नीतियां
2021 में सत्ता में लौटने के बाद तालिबान ने महिलाओं के अधिकारों पर लगातार हमले किए हैं. लड़कियों को माध्यमिक और उच्च शिक्षा से वंचित कर दिया गया है, जिससे अफगानिस्तान दुनिया का एकमात्र देश बन गया जहां ऐसी पाबंदी है. महिलाओं को पूरे शरीर ढकने वाले कपड़े पहनने, यात्रा के लिए महरम साथ रखने और पार्क, जिम, सैलून जैसे सार्वजनिक स्थानों पर जाने से रोका गया है. सरकारी नौकरियों, एनजीओ और कई व्यवसायों से उन्हें हटा दिया गया है.
महिला अधिकार संगठन इस नए कानून की कड़ी निंदा कर रहे हैं. उनका मानना है कि यह घरेलू हिंसा को कानूनी मान्यता देता है और महिलाओं को और अधिक कमजोर बनाता है. अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है, जहां उनकी आवाज दबाई जा रही है और अधिकार छीने जा रहे हैं.


