Exclusive: 'चंद पैसों में देश की सुरक्षा का सौदा, ऑपरेशन बॉर्डर से हुआ एक बांग्लादेशी साजिश का बड़ा खुलासा'

भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर अवैध घुसपैठ का खतरनाक खेल चल रहा है, जिसमें सीमा के रखवाले और स्थानीय नेता भी शामिल हैं. ‘ऑपरेशन बॉर्डर’ ने पैसों के लालच में देश बेचने वाले इस नेटवर्क का सच उजागर किया है. केले के बेड़ों से नदी पार कराई जा रही घुसपैठ और पुलिस-नेताओं की मिलीभगत की कहानी जानने के लिए पूरी खबर पढ़ें. यह खुलासा आपके होश उड़ा देगा!

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Edited By: Aprajita

Exclusive: देश की सुरक्षा और सीमाओं की सुरक्षा का जिम्मा जिनके कंधों पर है, जब वही कुछ पैसे के लिए देश बेचने पर उतर आएं, तो ये हर देशवासी के लिए चिंता का विषय है. ‘ऑपरेशन बॉर्डर’ ने ऐसी ही एक खतरनाक साजिश को उजागर किया है. हमारी टीम ने जान जोखिम में डालकर बांग्लादेशी घुसपैठियों की अवैध घुसपैठ का खुलासा किया.

4097 किमी लंबे बॉर्डर पर रचा जा रहा साजिश का खेल

भारत और बांग्लादेश के बीच 4097 किमी लंबी सीमा है, जिसमें से 3112 किमी पर बाड़ लग चुकी है. बाकी हिस्सों में सुरक्षा का जिम्मा बॉर्डर आउटपोस्ट के पास है. पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले के बनगांव और पैटरापोल बॉर्डर जैसे इलाकों में घुसपैठ के लिए सबसे ज्यादा साजिशें रची जा रही हैं.

बनगांव बॉर्डर से महज 3 किमी दूर हमारी टीम को ऐसा नेटवर्क मिला, जहां एक होम्योपैथिक डॉक्टर और तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेता अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे.

दलाल और नेता: घुसपैठ का पूरा तंत्र

डॉ. उत्तम साहा, जो खुद को होम्योपैथिक डॉक्टर बताते हैं, इस साजिश के अहम कड़ी हैं. उन्होंने हमारे रिपोर्टर से बातचीत में खुलासा किया कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को केले के बेड़ों और तैरकर नदी पार कराई जाती है. इसके लिए स्थानीय नेताओं और पुलिस के साथ पूरा सेटअप है.

उत्तम साहा ने बताया कि उनके रिश्तेदार, तृणमूल नेता परितोष साहा, इस पूरे तंत्र के मास्टरमाइंड हैं. उनके साथ बीएसएफ और पुलिस के कुछ अधिकारी भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि हर गतिविधि “सेटिंग” के साथ होती है, जिसमें हर स्तर पर रिश्वत दी जाती है.

दलाल जिया मंडल का खुलासा

हमारी टीम जिया मंडल नाम के एक दलाल से भी मिली. जिया ने बताया कि नदी में अभी पानी ज्यादा है, इसलिए केले के बेड़ों से घुसपैठ कराना खतरनाक है. हालांकि, पानी सूखने के बाद यह काम आसानी से हो सकता है. उसने यह भी कहा कि बॉर्डर पार कराकर घुसपैठियों को बनगांव रेलवे स्टेशन तक पहुंचाने का पूरा प्लान तैयार होता है. इस दौरान बीएसएफ और जीआरपी को प्रति व्यक्ति 800 रुपये रिश्वत दी जाती है.

चौंकाने वाला सच: कौन है जिम्मेदार?

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इस साजिश में सीमा की सुरक्षा के जिम्मेदार लोगों की भी मिलीभगत है. नेताओं, पुलिस और बीएसएफ के कुछ अधिकारी पैसों के लालच में देश के दुश्मनों के साथ मिलकर इस खेल को अंजाम दे रहे हैं.

क्यों है यह खतरनाक?

अवैध घुसपैठ न केवल देश की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक समस्याओं को भी बढ़ा रहा है. यह खुलासा सिर्फ बांग्लादेश से हो रही घुसपैठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बताता है कि देश के भीतर कैसे भ्रष्टाचार का जाल फैला हुआ है. ‘ऑपरेशन बॉर्डर’ ने यह साबित कर दिया है कि सुरक्षा में एक छोटी सी चूक बड़े खतरे का कारण बन सकती है. अब जरूरत है कि इस साजिश में शामिल हर शख्स को सख्त सजा दी जाए और सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत किया जाए.

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