अमेरिका ने ईरान पर लगाए नए प्रतिबंध, ओमान में वार्ता के ट्रंप का फैसला

ओमान में अप्रत्यक्ष वार्ता के तुरंत बाद अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर नए प्रतिबंध लगाए. 14 जहाजों (तुर्की, भारत, यूएई ध्वज वाले) और 15 संस्थाओं पर रोक. ट्रंप ने अधिकतम दबाव अभियान तेज किया. ईरान ने इसे आर्थिक आतंकवाद बताया, निर्यात जारी रखने की ठान ली.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः ओमान में ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता खत्म होने के कुछ घंटों बाद ही संयुक्त राज्य अमेरिका ने शुक्रवार को ईरान के तेल निर्यात पर नकेल कसने के लिए नए प्रतिबंधों की घोषणा की. अमेरिकी विदेश विभाग ने 14 जहाजों को निशाना बनाया है, जो ईरानी तेल का परिवहन कर रहे थे. इनमें तुर्की, भारत और संयुक्त अरब अमीरात के ध्वज वाले जहाज शामिल हैं.

विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने कहा कि ईरान अपने तेल राजस्व का इस्तेमाल दुनिया भर में अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों को फंड करने और घरेलू दमन को बढ़ाने के लिए कर रहा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने अधिकतम दबाव अभियान के तहत ईरान के अवैध तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात को लगभग खत्म करने के लिए प्रतिबंधों को और सख्त कर रहे हैं.

नए प्रतिबंधों का दायरा

अमेरिका ने इन 14 जहाजों के साथ किसी भी तरह के लेन-देन पर पूरी रोक लगा दी है. इसके अलावा 15 संस्थाओं और दो व्यक्तियों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं. ये कदम ट्रम्प प्रशासन के पहले कार्यकाल से चली आ रही नीति का हिस्सा हैं, जिसमें दुनिया के सभी देशों को ईरानी तेल खरीदने से रोका गया था. अमेरिका का दावा है कि ईरान का तेल निर्यात अब काफी हद तक कम हो चुका है, लेकिन कुछ जहाज अभी भी गुप्त तरीके से तेल पहुंचा रहे हैं.

ओमान में अप्रत्यक्ष वार्ता 

इन प्रतिबंधों की घोषणा ऐसे समय हुई है जब ईरान के विदेश मंत्री ने ओमान में ट्रम्प के वरिष्ठ दूतों के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत की थी.  ईरानी मंत्री ने वार्ता के बाद कहा कि माहौल सकारात्मक रहा. ये वार्ताएं ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद हुए सबसे बड़े विरोध प्रदर्शनों को दबाने के बाद शुरू हुई थीं. ईरान ने इन प्रदर्शनों में सैकड़ों लोगों की मौत और हजारों की गिरफ्तारी का आरोप अमेरिका पर लगाया था.

ट्रंप ने पहले भी ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की धमकी दी थी और फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी बढ़ा दी थी. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ये प्रतिबंध ईरान को परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों से रोकने का हिस्सा हैं.

ईरान की स्थिति

ईरान ने इन प्रतिबंधों को आर्थिक आतंकवाद करार दिया है और कहा है कि वह अपने तेल निर्यात को जारी रखेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि नए प्रतिबंधों से ईरान की अर्थव्यवस्था पर और दबाव बढ़ेगा, खासकर जब वैश्विक तेल बाजार पहले से ही अस्थिर है. भारत और तुर्की जैसे देश, जो ईरानी तेल के बड़े खरीदार रहे हैं, अब इन जहाजों के साथ लेन-देन से बचेंगे.

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