टैरिफ की वजह से अमेरिका की महंगाई ने तोड़ी कमर! ट्रंप समर्थकों की अकड़ फिर भी नहीं हो रही ढीली
अमेरिका में टैरिफ की वजह से महंगाई बढ़ती जा रही है. लेकिन फिर भी ट्रंप समर्थक इसका विरोध न कर राष्ट्रपति का समर्थन कर रहे हैं.

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में महंगाई एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है. टैरिफ नीतियों और आर्थिक बदलावों के कारण जीवनयापन की लागत बढ़ी है, लेकिन उनके कट्टर समर्थक अब भी पूरे जोश के साथ खड़े हैं. वे मानते हैं कि ये नीतियां फिलहाल मुश्किलें पैदा कर रही हैं, लेकिन लंबे समय में फायदा होगा. हाल के सर्वे बताते हैं कि ट्रंप वोटरों में से तीन-चौथाई उनकी आर्थिक हैंडलिंग को मंजूर करते हैं.
समर्थकों का अटूट भरोसा
ट्रंप समर्थकों से बात करने पर पता चलता है कि वे महंगाई को ट्रंप की गलती नहीं मानते. डेनवर के एक एचआर प्रोफेशनल कहते हैं कि बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है, लेकिन पेट्रोल जैसी चीजों में राहत मिली है. वे ट्रंप को जीवन लागत संभालने पर 8/10 अंक देते हैं.
ज्यादातर समर्थक कहते हैं कि राष्ट्रपति के पास कोई जादू की छड़ी नहीं, लेकिन उनकी नीतियां भविष्य में खरीद क्षमता बढ़ाएगी. वे महंगाई के लिए बड़े कॉरपोरेट्स की लालच और पुरानी आर्थिक समस्याओं को जिम्मेदार ठहराते हैं.
मौजूदा आर्थिक हालात
2025 में मुद्रास्फीति दर औसतन 2.7% से 3% के आसपास रही है. जनवरी में यह 3% पर पहुंची, जो ट्रंप के कार्यकाल की शुरुआत थी. कोर इन्फ्लेशन भी 3% के करीब है. बेरोजगारी दर 4.4% है, जो चार साल के उच्च स्तर पर है. हालांकि, अर्थव्यवस्था में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन कीमतें ऊंची बनी हुई हैं. फेडरल रिजर्व को उम्मीद है कि 2026 में यह 2.4% तक गिरेगी. कुल मिलाकर, ट्रंप की मंजूरी दर अर्थव्यवस्था पर 31% से 41% के बीच उतार-चढ़ाव कर रही है.
चुनावी चिंताएं और ट्रंप की रणनीति
2026 के मिड-टर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को डर है कि महंगाई स्वतंत्र वोटरों को दूर कर सकती है. ट्रंप पूर्व राष्ट्रपति बाइडन को दोष देते हैं और महंगाई को कभी 'फर्जी' कहते हैं. वे रैलियों में कहते हैं कि अमेरिका को फिर किफायती बनाना उनकी प्राथमिकता है.
पेंसिल्वेनिया की एक रैली में उन्होंने पेट्रोल और ऊर्जा कीमतें घटाने का श्रेय लिया. रॉयटर्स-इप्सोस पोल में ट्रंप वोटरों की मंजूरी नवंबर से 10% बढ़ी है. हालांकि, बहस जारी है कि क्या राजनीतिक वफादारी आर्थिक सच्चाई पर भारी पड़ रही है.


