ईरान के पास अमेरिका का ‘समंदर का दैत्य’, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में बड़े एयर फोर्स अभ्यास की घोषणा की है और अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को ईरान के पास तैनात किया गया है. ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों और उस पर सख्त कार्रवाई के चलते क्षेत्र में टकराव की आशंका और गहरी हो गई है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर पश्चिम एशिया को अनिश्चितता के दौर में धकेल दिया है. हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि किसी भी वक्त टकराव की चिंगारी भड़क सकती है. इसी बीच अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में बड़े पैमाने पर सैन्य गतिविधियों का संकेत देकर वैश्विक चिंता और बढ़ा दी है. क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव के बीच अब समुद्र से लेकर आसमान तक अमेरिकी सैन्य हलचल तेज होती नजर आ रही है.

अमेरिका ने क्या घोषणा की?

अमेरिका ने घोषणा की है कि वह मिडिल ईस्ट में कई दिनों तक चलने वाला एयर फोर्स अभ्यास करने जा रहा है. यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब ईरान में सरकार विरोधी आंदोलन जारी हैं और अमेरिका खुले तौर पर तेहरान पर दबाव बना रहा है. अमेरिकी वायुसेना के सेंट्रल कमांड के अनुसार, इस अभ्यास का उद्देश्य क्षेत्र में लड़ाकू विमानों की तैनाती, संचालन और निरंतर मौजूदगी की क्षमता को परखना है. हालांकि अभ्यास की तारीख और स्थान को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है, जिससे अटकलें और तेज हो गई हैं.

इस सैन्य अभ्यास से ठीक पहले अमेरिकी नौसेना का शक्तिशाली अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप मिडिल ईस्ट पहुंच चुका है. इसे अमेरिका की समुद्री ताकत की रीढ़ माना जाता है. इस समूह में अत्याधुनिक युद्धपोत, लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर और हजारों सैनिक शामिल हैं. ईरान के नजदीक इसकी तैनाती को सामान्य सैन्य गतिविधि से कहीं अधिक माना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे क्षेत्र में शक्ति संतुलन बदल गया है और अमेरिका ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि वह किसी भी स्थिति के लिए तैयार है.

ईरान के हालात संवेदनशील 

ईरान के भीतर हालात भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं. बीते महीनों में वहां शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब केवल आर्थिक मांगों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वे शासन के खिलाफ बड़े आंदोलन में बदल चुके हैं. महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से उपजे असंतोष ने लाखों लोगों को सड़कों पर ला खड़ा किया. सरकार ने इन प्रदर्शनों को सख्ती से दबाने की कोशिश की, जिसके दौरान बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुईं और जानमाल का नुकसान हुआ. मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, हिंसा में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है.

इन घटनाओं को लेकर अमेरिका लगातार ईरान की आलोचना करता रहा है. वॉशिंगटन ने चेतावनी दी है कि यदि दमन जारी रहा तो उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं. हालांकि हाल के दिनों में अमेरिकी रुख में कुछ नरमी भी दिखाई दी, लेकिन इसके बावजूद सैन्य तैयारियां कम नहीं हुई हैं. अब सवाल यह है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ती अमेरिकी सैन्य मौजूदगी केवल दबाव बनाने की रणनीति है या फिर किसी बड़े संघर्ष की भूमिका. फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें ईरान-अमेरिका समीकरण पर टिकी हुई हैं.

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