खरीफ सीजन में पाकिस्तान पर जल संकट का दोहरा वार, दो बड़े डैम डेड लेवल पर

Pakistan Water Crisis: पाकिस्तान इस वक्त भीषण जल संकट से जूझ रहा है. मंगला और टरबेला जैसे दो प्रमुख बांध डेड लेवल के करीब पहुंच गए हैं. भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने के बाद पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों से मिलने वाले पानी में भारी कमी आई है, जिससे पंजाब और सिंध जैसे कृषि प्रधान प्रांत बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.

Shivani Mishra
Edited By: Shivani Mishra

Pakistan Water Crisis: पाकिस्तान इस समय एक गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है. देश के दो प्रमुख बांध मंगला और टरबेला अपने 'डेड लेवल' के बेहद करीब पहुंच चुके हैं. भारत द्वारा 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित करने के बाद पश्चिमी नदियों से पाकिस्तान को मिलने वाला जल प्रवाह काफी घट गया है. इससे देश की कृषि और पेयजल आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है.

यह संकट ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान में खरीफ फसलों की बुवाई का मौसम चल रहा है. भारत की ओर से जलस्रोतों की सफाई और खुद के भंडारण को बढ़ाने की गतिविधियों के चलते जल का प्रवाह और भी कम हो रहा है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आने वाले हफ्तों में स्थिति और भयावह हो सकती है.

मंगला और टरबेला बांध डेड लेवल के करीब

मंगला बांध जो झेलम नदी पर स्थित है और टरबेला बांध जो सिंधु नदी पर है, दोनों ही अपने न्यूनतम स्तर के करीब पहुंच चुके हैं. भारत द्वारा अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद संधि निलंबित कर दी गई थी, जिसके चलते पाकिस्तान को जल आपूर्ति में भारी कटौती झेलनी पड़ी है. भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर में बांधों की नियमित सफाई और फ्लशिंग की प्रक्रिया से भी पाकिस्तान को मिलने वाले जल में और कमी आई है.

पंजाब और सिंध में पानी की भारी कमी

पाकिस्तान की 'इंडस रिवर सिस्टम अथॉरिटी' (IRSA) के अनुसार बुधवार को देश ने जितना पानी निकाला वह उसके जल प्रवाह से 11,180 क्यूसिक अधिक था.

IRSA की रिपोर्ट के मुताबिक टरबेला, मंगला, मराला और नौशेरा जैसे जल मॉनिटरिंग स्टेशनों से कुल 2,52,791 क्यूसिक जल छोड़ा गया, जबकि कुल प्रवाह मात्रा 2,41,611 क्यूसिक ही रही. इस असंतुलन का सीधा असर पंजाब और सिंध जैसे कृषि-आधारित प्रांतों पर पड़ा है.

पंजाब प्रांत को इस बार 1,14,600 क्यूसिक पानी मिला, जो पिछले साल इसी दिन की तुलना में 29,000 क्यूसिक कम है. यह 20% की भारी गिरावट है, जो खरीफ की बुवाई को प्रभावित कर सकती है.

IRSA ने जताई 21% जल संकट की आशंका

IRSA की सलाहकार समिति ने पिछले महीने एक बैठक में 1 मई से 10 जून तक के खरीफ सीज़न में 21% जल संकट की संभावना जताई थी. विशेष रूप से मराला पर चिनाब नदी के प्रवाह में अचानक आई कमी का ज़िक्र करते हुए कहा गया कि यह भारत द्वारा जल की सीमित आपूर्ति के कारण हुआ है.

11 जून से 30 सितंबर तक के लिए भी जल संकट की संभावना 7% आंकी गई है, जो खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है.

भारत ने डेटा साझा करने से किया इनकार

भारत ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियों में वह सिंधु जल संधि के तहत जल प्रवाह से जुड़ा कोई डेटा पाकिस्तान के साथ साझा करने के लिए बाध्य नहीं है. यह निर्णय पहलगाम आतंकी हमले के बाद लिया गया है, जिसमें भारत ने पाकिस्तान पर परोक्ष समर्थन का आरोप लगाया था.

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