Exclusive: अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों ने भारत में कहां ली शरण, 'ऑपरेशन बॉर्डर' से हुआ चौंका देने वाला खुलासा

भारत में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या बढ़ रही है, जो जाली दस्तावेजों के जरिए भारतीय नागरिकता हासिल कर रहे हैं. ऐसे में हमारी अंडरकवर टीम की पड़ताल में कई घुसपैठियों ने खुलासा किया, जो बेहद चौंका देने वाला है.

Simran Sachdeva

आपने अब तक यह खबर तो सुनी होगी कि कैसे बांग्लादेश से भारत में अवैध घुसपैठ हो रहा है. लेकिन असल सच तो कुछ और ही है. दरअसल, जब हमने इस अवैध घुसपैठ के बारे में जानने की कोशिश की, तो हमें जो पता लगा वो बेहद चौंकाने वाला है. हमने यह पता लगाने के प्रयास किए कि ये अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए भारत में कहां रहते हैं. इतना ही नहीं, हमारी अंडरकवर टीम की पड़ताल ने हैरान कर देने वाले खुलासे भी किए. 

पड़ताल के दौरान, हमें कई बांग्लादेशी मिले, जिन्होंने जाली दस्तावेज बनवाकर भारत में नागरिकता हासिल कर ली है. हाबरा के रविंदर पल्ली गांव में हमें एक बांग्लादेशी महिला से मुलाकात हुई, जिसने बताया, "हम कुल 6 लोग हैं, हमारे माता-पिता का आधार कार्ड नहीं बना, ये सब बांग्लादेश में हैं." महिला ने यह भी बताया कि इन दस्तावेजों को बनवाने के लिए उन्होंने 7 हजार रुपए खर्च किए.

जाली दस्तावेज बनाने का तरीका

एक अन्य बांग्लादेशी, मिराजुल ने बताया, "मैं बचपन में ही भारत आ गया था. मेरी मां नहीं थी और पिताजी ने मुझे भगा दिया था. खाने-पीने का कोई इंतजाम नहीं था, काम नहीं था, फिर मैं घूमते-घूमते यहां आ गया." मिराजुल ने यह भी बताया कि उसने एक भारतीय महिला से शादी की है और अब उसका घर भी बन गया है. जब उससे पूछा गया कि उसने बॉर्डर कैसे पार किया, तो उसने कहा कि वह बहुत छोटा था, इसलिए उसे याद नहीं है, लेकिन अब वह खेती करता है.

एक अन्य अवैध बांग्लादेशी, राजू मंडल ने बताया कि वह फरीदपुर ढाका का रहने वाला है. उसने बताया, "मैं बहुत छोटा था, उसी समय भारत आ गया था." जब उससे बॉर्डर पार करने के बारे में पूछा गया, तो उसने कहा कि उस समय तार नहीं था और वह लॉरी में हेल्पर का काम करता था. अब वह ड्राइविंग करता है. 

भारत में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की बढ़ती संख्या

हमारी टीम की मुलाकात ऐसे दर्जनों अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों से हुई, जो नेताओं और दलालों की मदद से भारतीय नागरिक बन चुके हैं. नेताओं की मिलीभगत से दलालों के जरिए इनके भारतीय दस्तावेज तैयार किए जाते हैं और ये लोग अब हमेशा-हमेशा के लिए भारत के नागरिक बन जाते हैं. यह सच्चाई साबित करती है कि भारत में अवैध घुसपैठ और नागरिकता का यह नेटवर्क कितनी गहराई तक फैल चुका है. 

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