लात-घूंसो के साथ...., तुर्की की संसद बनी जंग का मैदान, न्यायमंत्री नियुक्ति पर सांसद आपस में भिड़े

तुर्की की संसद में बुधवार को जबरदस्त हंगामा मच गया. नए न्याय मंत्री अकीन गुरलेक की शपथ के दौरान विपक्षी सांसदों ने उन्हें रोकने की कोशिश की. सत्ताधारी AKP सदस्यों ने जवाबी कार्रवाई की, तो धक्का-मुक्की शुरू हो गई. सदन में अफरातफरी फैल गई और बैठक बीच में ही स्थगित करनी पड़ी.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली: तुर्की की संसद में बुधवार को जोरदार हाथापाई हुई, जब सत्तारूढ़ पार्टी और विपक्षी सांसदों के बीच नए न्याय मंत्री की नियुक्ति को लेकर तीखी झड़प हो गई. इस विवादास्पद नियुक्ति ने सदन की कार्यवाही को बाधित कर दिया और सत्र को अस्थायी रूप से स्थगित करना पड़ा. राष्ट्रपति रेसेप तैय्यिप एर्दोगन द्वारा नियुक्त अकीन गुरलेक को शपथ दिलाने के दौरान विपक्ष ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिससे सदन में धक्का-मुक्की और घूंसे चलने लगे.

यह घटना कैबिनेट फेरबदल के बीच हुई, जिसमें न्याय मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण पद पर गुरलेक की नियुक्ति को लेकर विपक्ष ने राजनीतिक पूर्वाग्रह का आरोप लगाया है. सदन में मौजूद फुटेज में सांसदों को एक-दूसरे को धक्का देते और मारपीट करते देखा गया.

झड़प कैसे शुरू हुआ?

झड़प तब शुरू हुई जब विपक्षी सांसदों ने मंच के पास इकट्ठा होकर गुरलेक को शपथ लेने से रोकने की कोशिश की. सत्तारूढ़ जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी के सदस्यों ने उम्मीदवार की सुरक्षा के लिए आगे बढ़े, जिससे संसद के फ्लोर पर अफरा-तफरी मच गई.

स्पीकर ने व्यवस्था बहाल करने के लिए सत्र को 15 मिनट के लिए स्थगित कर दिया. ब्रेक के बाद गुरलेक ने सत्तारूढ़ पार्टी के सांसदों के घेरे में शपथ ली. गुरलेक पहले इस्तांबुल के मुख्य लोक अभियोजक रह चुके हैं, जहां उन्होंने मुख्य विपक्षी पार्टी रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी के कई सदस्यों से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामलों की देखरेख की.

विपक्षी नेता लंबे समय से आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने सरकार के आलोचकों को कमजोर करने के लिए राजनीतिक रूप से प्रेरित अभियोजन चलाए. वे कहते हैं कि न्याय मंत्री के रूप में उनकी पदोन्नति देश में न्यायिक स्वतंत्रता को और कमजोर करेगी. सीएचपी और अन्य विपक्षी दल मानते हैं कि उनका रिकॉर्ड तुर्की में कानून के शासन और लोकतांत्रिक जवाबदेही के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

कैबिनेट फेरबदल ने विवाद को हवा दी

यह मारपीट एर्दोगन द्वारा घोषित कैबिनेट फेरबदल के बीच हुई, जिसमें एरज़ुरुम प्रांत के गवर्नर मुस्तफा चिफ्तची को गृह मंत्री बनाया गया है. यह फेरबदल विपक्षी दलों द्वारा संचालित नगर पालिकाओं पर चलाए जा रहे बड़े पैमाने के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के संदर्भ में हुआ है. हाल के वर्षों में सीएचपी से जुड़े सैकड़ों स्थानीय अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इन जांचों में सबसे प्रमुख नाम इस्तांबुल के मेयर एकरेम इमामोग्लू का है, जिन्हें एर्दोगन का मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माना जाता है. इमामोग्लू को पिछले साल भ्रष्टाचार और संगठित अपराध के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था.

नवंबर में गुरलेक ने इमामोग्लू के खिलाफ 142 अलग-अलग आरोपों वाला व्यापक अभियोग दायर किया, जिसमें अभियोजकों ने 2,000 साल से अधिक की संयुक्त सजा की मांग की. इस कदम की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक आलोचना हुई.

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