ZSI ने खोजी खून चूसने वाली 23 नई मक्खियों की प्रजातियां, मवेशियों के लिए बड़ा खतरा!
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) ने अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में खून चूसने वाली मक्खियों की 23 नई प्रजातियों की खोज की है. इनमें से 13 प्रजातियां भारत में पहली बार देखी गई हैं. यह मक्खियां ब्लू टंग वायरस फैलाती हैं, जो मवेशियों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है. कुछ प्रजातियां इंसानों को भी काटती हैं, लेकिन अभी तक इनसे इंसानों में कोई बीमारी नहीं फैली. यह खोज कैसे पशुधन और खेती के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकती है? जानिए पूरी खबर में!

Blood Sucking Flies: भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के शोधकर्ताओं ने हाल ही में अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में खून चूसने वाली मक्खियों की 23 नई प्रजातियों की खोज की है. इनमें से 13 प्रजातियां भारत में पहली बार देखी गई हैं. इन मक्खियों का वैज्ञानिक नाम क्यूलिकोइड्स है, और ये मच्छरों की तरह खून चूसने की आदत रखती हैं. ZSI की निदेशक, धृति बनर्जी के अनुसार, यह खोज इस क्षेत्र में किए गए सबसे बड़े सर्वेक्षण का हिस्सा है, जिसमें इन खून चूसने वाली मक्खियों के व्यवहार और प्रभावों पर गहन अध्ययन किया गया है.
ब्लू टंग वायरस: मवेशियों के लिए बड़ा खतरा
इन मक्खियों के बारे में एक अहम बात यह है कि वे ब्लू टंग वायरस फैलाने के लिए जिम्मेदार हो सकती हैं. यह वायरस मुख्य रूप से भेड़ों, बकरियों और अन्य मवेशियों में फैलता है. ब्लू टंग वायरस से ग्रस्त पशुओं की जीभ का रंग नीला हो जाता है, साथ ही बुखार, चेहरे में सूजन और अत्यधिक लार बहने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. इस बीमारी के कारण मवेशियों की मौत तक हो सकती है, और यह पशुपालन और कृषि अर्थव्यवस्था के लिए भारी नुकसान का कारण बन सकती है.
मक्खियां इंसानों को भी बना सकती हैं शिकार
हालांकि इन मक्खियों के इंसानों पर प्रभाव के बारे में अब तक कोई गंभीर बीमारी का पता नहीं चला है, लेकिन शोध में यह बात सामने आई है कि इनमें से 17 प्रजातियां इंसानों को भी काटती हैं. इसका मतलब यह है कि इन मक्खियों से होने वाली समस्या सिर्फ पशुधन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इंसान भी इनके शिकार हो सकते हैं.
मक्खियों की संख्या और प्रभाव पर नजर
ZSI के डिप्टेरा (मक्खी) अनुभाग के प्रमुख डॉ. अतानु नस्कर का कहना है कि इन मक्खियों की जनसंख्या और उनके फैलाए जाने वाले रोगों को समझने के लिए पूरे द्वीपसमूह का व्यवस्थित सर्वेक्षण आवश्यक है. वरिष्ठ शोधकर्ता कौस्तव मुखर्जी के मुताबिक, जैसे-जैसे सर्वेक्षण आगे बढ़ेगा, नई प्रजातियां सामने आ सकती हैं, और वैज्ञानिक इन मक्खियों के व्यवहार और आनुवंशिकी पर भी नजर बनाए रखेंगे.
क्यों महत्वपूर्ण है यह अध्ययन?
यह शोध न केवल पशुधन, खेती और कृषि अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक साबित हो सकता है, बल्कि इंसानों के लिए भी इन मक्खियों से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को ध्यान में रखते हुए जागरूकता फैलाना जरूरी है. ZSI द्वारा किया जा रहा यह अध्ययन भविष्य में इन मक्खियों की संख्या और उनके प्रभावों को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है, ताकि हम इस खतरनाक स्थिति से बच सकें.
धान के खेत मे बत्तखों को कीड़े मकोड़े खाने के लिए छोड़ा जाता है,
— Dr. Sheetal yadav (@Sheetal2242) January 26, 2025
ये चावल के पौधों की सुरक्षा का एक प्राकृतिक तरीका होता है।
वे अपने मल में नाइट्रोजन युक्त उर्वरक भी छोड़ती हैं जो फसलों के लिए लाभदायक होता है। pic.twitter.com/s1KbrkZV0r
तो अब आप समझ ही गए होंगे कि ये खून चूसने वाली मक्खियां कितनी खतरनाक हो सकती हैं, खासकर जब ये ब्लू टंग वायरस जैसी बीमारियों को फैलाती हैं. यह शोध हमें बताता है कि हमे इस समस्या का हल निकालने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है, ताकि हमारे मवेशी, खेती और पशुपालन के व्यवसाय को इस खतरे से बचाया जा सके. यह एक गंभीर मुद्दा है, जिसे हम सबको मिलकर समझना और सुलझाना होगा.


