कमिटमेंट से पहले एक्सपेरिमेंट! युवाओं को क्यों पसंद आ रही 'रोस्टर डेटिंग'

रोस्टर डेटिंग में एक व्यक्ति एक साथ कई लोगों को डेट करता है. यह प्रतिबद्धता से पहले पारदर्शिता पर आधारित ट्रेंड है, जो शहरी भारत में डेटिंग ऐप्स और बदलती सोच के साथ तेजी से लोकप्रिय हो रहा है.

Shraddha Mishra

आज के दौर में मल्टीटास्किंग को काबिलियत और आत्मविश्वास की निशानी माना जाता है. लोग एक साथ कई काम करने पर गर्व महसूस करते हैं. यही सोच अब रिश्तों और डेटिंग की दुनिया में भी दिखाई देने लगी है. इसी कड़ी में एक नया ट्रेंड तेजी से चर्चा में है, जिसे "रोस्टर डेटिंग" कहा जा रहा है. सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स की वजह से यह शब्द अब आम बातचीत का हिस्सा बनता जा रहा है.

क्या है रोस्टर डेटिंग?

रोस्टर डेटिंग का मतलब है एक ही समय में एक से ज्यादा लोगों को डेट करना. इसमें व्यक्ति चार या पांच लोगों से मिल-जुल सकता है और अलग-अलग दिनों के लिए अलग डेट प्लान कर सकता है. जैसे किसी के साथ मूवी देखना, किसी और के साथ डिनर पर जाना या वीकेंड पर किसी कार्यक्रम में शामिल होना. इस तरह की डेटिंग में कोई एक व्यक्ति केंद्र में नहीं होता. सबसे जरूरी नियम यही माना जाता है कि सभी के साथ ईमानदारी बरती जाए.

यह कोई बिल्कुल नई सोच नहीं है, लेकिन अब इसे एक नाम मिल गया है और लोग खुलकर इस पर बात करने लगे हैं. हालांकि, हर कोई इस ट्रेंड से सहमत नहीं है. सोशल मीडिया पर इसे लेकर मजाक भी बन रहे हैं और कई लोग कहते हैं कि डेटिंग से जुड़े नए-नए शब्द लोगों को और ज्यादा उलझा रहे हैं.

लोग रोस्टर डेटिंग क्यों चुनते हैं?

इसके पीछे हर व्यक्ति की अलग वजह हो सकती है. कुछ लोग पुराने रिश्तों से भावनात्मक रूप से थक चुके होते हैं. कुछ लोग “परफेक्ट पार्टनर” की तलाश में विकल्प खुले रखना चाहते हैं. वहीं कुछ लोग बिना किसी दबाव के बस लोगों को जानना चाहते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार यह तरीका तनाव और असुरक्षा से निपटने का एक जरिया बन जाता है. जिन लोगों को रिश्तों में ठुकराए जाने का डर होता है, उनके लिए एक से ज्यादा विकल्प रखना भावनात्मक रूप से सुरक्षित लगता है.

क्या यह धोखे जैसा है?

कई लोगों को रोस्टर डेटिंग बेवफाई जैसी लगती है, लेकिन विशेषज्ञ इसे धोखे से अलग मानते हैं. धोखा तब होता है जब किसी रिश्ते में प्रतिबद्धता के बाद छुपकर कुछ किया जाए. वहीं रोस्टर डेटिंग आमतौर पर प्रतिबद्धता से पहले होती है और इसमें साफ बातचीत और पारदर्शिता पर जोर दिया जाता है. हालांकि, यह भी सच है कि लगातार विकल्प खुले रखने की आदत भविष्य में गंभीर रिश्तों में परेशानी पैदा कर सकती है.

सिचुएशनशिप और पॉलीअमोरी से अलग कैसे?

अक्सर रोस्टर डेटिंग को सिचुएशनशिप या पॉलीअमोरी से जोड़ दिया जाता है, जबकि तीनों में फर्क है. रोस्टर डेटिंग ज्यादातर अस्थायी और बिना स्पष्ट नियमों वाली होती है. वहीं पॉलीअमोरी और ओपन रिलेशनशिप आपसी सहमति, भरोसे और स्पष्ट सीमाओं पर आधारित होते हैं. इसके लिए भावनात्मक समझ और जिम्मेदारी की जरूरत होती है.

भारत में बढ़ता चलन

यह ट्रेंड अब सिर्फ पश्चिमी देशों तक सीमित नहीं है. शहरी भारत में भी रोस्टर डेटिंग धीरे-धीरे जगह बना रही है. देर से शादी, आर्थिक आत्मनिर्भरता, डेटिंग ऐप्स और बदलती सोच इसके बड़े कारण हैं. डेटिंग ऐप्स ने विकल्पों की भरमार दिखाकर लोगों को ज्यादा सतर्क और चयनशील बना दिया है.

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