दिल कितनी बार हारता है? शोध में सामने आया इश्क का गणित

अमेरिका के 'Kinsey Institute' की स्टडी के अनुसार, एक व्यक्ति अपनी पूरी जिंदगी में औसतन लगभग दो बार गहरे और शिद्दत वाले प्यार का अनुभव करता है. रिसर्च बताती है कि सच्चा प्यार बार-बार नहीं होता और रिश्तों में जुनून के साथ भरोसा व समझदारी भी उतनी ही जरूरी है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

वैलेंटाइन वीक के दौरान चारों ओर प्रेम और रोमांस की चर्चा छाई रहती है. कपल्स एक-दूसरे को खास महसूस कराने के लिए सरप्राइज, गिफ्ट और खास पलों की प्लानिंग करते हैं. आम धारणा यह है कि सच्चा प्यार जीवन का सबसे अनमोल अनुभव होता है. फिल्मों और उपन्यासों में अक्सर 'पहली नजर के प्यार' या बेहद गहरे और जुनूनी इश्क को जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि की तरह दिखाया जाता है. लेकिन असल जिंदगी में क्या वाकई प्यार सिर्फ एक बार होता है या यह इंसान की जिंदगी में कई बार दस्तक देता है?

 'Kinsey Institute' का विस्तृत अध्ययन 

इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए अमेरिका के 'Kinsey Institute' में एक विस्तृत अध्ययन किया गया. इस रिसर्च में 18 से 99 वर्ष की उम्र के 10,036 सिंगल लोगों से पूछा गया कि वे अपनी जिंदगी में कितनी बार गहरे और शिद्दत वाले प्यार में पड़े हैं. नतीजों ने कई मिथकों को तोड़ दिया. शोध के अनुसार, औसतन एक व्यक्ति अपनी पूरी जिंदगी में लगभग दो बार (2.05 बार) गहरा और पैशनेट प्यार महसूस करता है. यानी अधिकांश लोगों को जीवन में सिर्फ दो बार ऐसा एहसास होता है, जिसे वे सच्चा और गहन प्रेम मानते हैं.

अध्ययन में यह भी सामने आया कि 14 प्रतिशत प्रतिभागियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने कभी भी ऐसा तीव्र प्रेम अनुभव नहीं किया. वहीं 28 प्रतिशत लोगों ने बताया कि वे सिर्फ एक बार गहरे प्यार में पड़े. 30 प्रतिशत लोगों ने दो बार, 17 प्रतिशत ने तीन बार और 11 प्रतिशत ने चार या उससे अधिक बार इस तरह के प्रेम का अनुभव किया.

स्टडी की प्रमुख शोधकर्ता 'Amanda Gesselman' के अनुसार, लोग प्यार के बारे में बहुत बातें करते हैं, लेकिन यह पहली बार है जब वैज्ञानिक रूप से यह समझने की कोशिश की गई कि जीवन में ऐसा अनुभव कितनी बार होता है. उनके मुताबिक, पैशनेट लव ज्यादातर लोगों के जीवन में सीमित बार ही आता है और यह कोई रोजमर्रा की भावना नहीं है.

उम्र और जेंडर के आधार पर विश्लेषण 

रिसर्च में उम्र और जेंडर के आधार पर भी विश्लेषण किया गया. दिलचस्प बात यह रही कि पुरुषों और महिलाओं के अनुभवों में कोई बड़ा अंतर नहीं पाया गया. हालांकि उम्र बढ़ने के साथ लोगों ने अधिक बार प्रेम का अनुभव बताने की बात कही. इससे संकेत मिलता है कि प्यार किसी भी उम्र में हो सकता है और इसके लिए कोई तय सीमा नहीं है.

इन निष्कर्षों से रिलेशनशिप काउंसलर्स और मनोवैज्ञानिकों को भी मदद मिलती है, क्योंकि इससे यह समझने में आसानी होती है कि गहरा जुनूनी प्रेम बार-बार नहीं होता. रिश्तों में सिर्फ पैशनेट लव ही नहीं, बल्कि दोस्ती, भरोसा, सम्मान और समझदारी भी उतनी ही अहम होती है.

क्या है  'Match Group' का आंकड़ा

डेटिंग प्लेटफॉर्म 'Match Group' के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में 60 प्रतिशत सिंगल लोग खुद को रोमांटिक मानते हैं. वहीं 73 प्रतिशत लोगों का मानना है कि फिल्में और सोशल मीडिया रिश्तों को लेकर अवास्तविक उम्मीदें पैदा करते हैं.

ऐसे में अगर किसी को अभी तक सच्चा प्यार नहीं मिला है, तो घबराने की जरूरत नहीं. हर व्यक्ति का अनुभव अलग होता है. प्यार कभी भी, किसी भी उम्र में और अलग-अलग रूप में सामने आ सकता है. बस उसे पहचानने और संजोने की जरूरत होती है.

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