जानिए कैसे खीरे के बिना अधूरी है जन्माष्टमी की पूजा?

आज पूरे देश में भगवान श्री कृष्ण का जन्म धूमधाम से मनाया जा रहा है, इस बार श्री कृष्ण के जन्माष्टमी को लेकर भम्र की स्थिती हुई थी। इस बार दो दिन जन्माष्टमी का त्यौहार मनया जा रहा है। 19 अगस्त को मथुरा औऱ वृंदावन के आधार पर मनाई जा रही है। इस दिन खीरे का महत्व होता

Janbhawana Times

आज पूरे देश में भगवान श्री कृष्ण का जन्म धूमधाम से मनाया जा रहा है, इस बार श्री कृष्ण के जन्माष्टमी को लेकर भम्र की स्थिती हुई थी। इस बार दो दिन जन्माष्टमी का त्यौहार मनाया जा रहा है। 19 अगस्त को मथुरा औऱ वृंदावन के आधार पर मनाई जा रही है। इस दिन खीरे का महत्व होता है कहा जाता है, इस दिन खीरा चढ़ाने से भगवान अपने भक्तों के सारे दुख हर लेते है, इस दिन अपने घर पर  ऐसे खीरा लाएं जिसमें थोड़ा डंठल और पत्तियां लगी हो।

खीरा का महत्व

जन्माष्ठमी पूजा के खीरे के इस्तेमाल के पीछे की मान्यता है कि जब बच्चा पैदा होता है तब उसको मां से अलग करने के लिए गर्भनाल को काटा जाता है। ठीक उसी प्रकार से जन्माष्टमी के दिन खीरे को डंठल से काटकर अलग किया जाता है जैसे भगवान श्री कृष्ण को देवकी से अगल किया गया था। ये भगवान श्री कृष्ण को मां देवकी से अलग करने का प्रतीक माना जाता है। ऐसा करने के बाद ही कान्हा की विधि विधान से पूजा शुरू की जाती है। पूजा के दौरान कृष्ण की आरती करें।

मोरपंख से उपाय

इस दिन घर के पूजास्थल में पांच मोरपंख रखें और रोजाना इनकी पूजा करें। इक्कीस दिन बाद इन मोरपंख को तिजोरी में लाकर रख दे, ऐसा करने से घर में सुख शांति का वाश होता है, व रोके हुए काम बनने लगते है।

आज के दिन चांदी के ताबीज में मोर पंख डालकर बच्चे को पहनाने से नजर दोष से मुक्ती मिलती है।

अगर आपको या आपके परिवार में से किसी व्यक्ति को सेहत से जुड़ी कोई परेशानी होती है तो पूजा घर में मोर पंख रख के नियमित रूप से पूजा करें।

अगर घर में राहु की वजह से आपको किसी प्रकार की कोई परेशानी होती है तो घर में पूर्व व उत्तर पश्चिम दीवार पर मोर पंख जरूर लगाएं।

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