छठ महापर्व की आज से शुरुआत: जानें नहाय-खाय के शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि
आज नहाय-खाय के पावन दिन दो शुभ योग बन रहे हैं, जो सूर्य देव की पूजा और साधना को और भी फलदायी बनाएंगे. इन योगों में की गई पूजा से माताओं को कई गुना पुण्य लाभ मिलेगा. तो आइए जानते हैं कि आज कौन-कौन से शुभ योग बन रहे हैं और नहाय-खाय की विधि व नियम क्या हैं.

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से छठ महापर्व की पावन शुरुआत हो चुकी है. सूर्य उपासना का यह चार दिवसीय पर्व पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है. आज नहाय-खाय के साथ इस महापर्व का शुभारंभ हो गया है. इसके बाद खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के साथ यह पर्व संपन्न होगा. 28 अक्टूबर को सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस व्रत का समापन होगा.
आज के दिन दो विशेष शुभ योग बन रहे हैं, जो छठ व्रती के लिए अत्यंत लाभकारी माने गए हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन योगों में सूर्य देव की साधना करने से कई गुना फल प्राप्त होता है. तो आइए जानते हैं आज बन रहे इन दो शुभ योगों और नहाय-खाय की विधि-विधान के बारे में विस्तार से:-
आज बन रहे कौन दो शुभ योग
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि यानी आज शोभन योग और रवि योग का संयोग बन रहा है. रवि योग का आरंभ सुबह से हो चुका है, जबकि शोभन योग का प्रभाव पूरी रात तक रहेगा. मान्यता है कि जो भी व्रती इन योगों में स्नान, ध्यान और पूजा-अर्चना करेगा, उसके सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होगा.
नहाय-खाय की विधि
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नहाय-खाय के दिन पवित्र नदियों जैसे गंगा, यमुना आदि में स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है.
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यदि नदी तक जाना संभव न हो तो नहाने के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें.
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इस दिन घर के पूजा स्थल और रसोई दोनों की पूर्ण स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें.
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स्नान के बाद पूजा स्थल पर दीपक और धूप जलाएं तथा छठी माता का ध्यान करें.
व्रत का संकल्प लें और संकल्प के समय यह मंत्र जप करें:- "ॐ अद्य अमुकगोत्रोऽमुकनामाहं मम सर्व पापनक्षयपूर्वक शरीरारोग्यार्थ श्री सूर्यनारायणदेवप्रसन्नार्थ श्री सूर्यषष्ठीव्रत करिष्ये".
छठ व्रत के नियम
छठ महापर्व में पवित्रता और अनुशासन का विशेष महत्व है. व्रती को पूरे व्रत के दौरान शुद्धता बनाए रखनी चाहिए. इस व्रत में गलती से भी अन्न या जल का सेवन नहीं किया जाता. पहले दिन यानी नहाय-खाय के भोजन में केवल सेंधा नमक का उपयोग किया जाता है. चारों दिनों तक वाद-विवाद से दूर रहें और मन, वचन तथा कर्म से पूर्ण संयम रखें.
Disclaimer: ये धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है, JBT इसकी पुष्टि नहीं करता.


