मकर संक्रांति पर सूर्यास्त के बाद करें ये शुभ काम, नहीं तो छूट सकता है पुण्य लाभ

मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का पावन पर्व है, जिसमें स्नान, दान और पूजा से अक्षय पुण्य की प्राप्ति मानी जाती है. इस दिन सूर्यास्त के बाद दीपक जलाना और पूजा करना शुभ होता है, जबकि तामसिक भोजन और गलत व्यवहार से बचने की सलाह दी जाती है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक प्रमुख और पावन पर्व है, जिसे हर वर्ष माघ मास में सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है. इस दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना गया है. उत्तरायण को देवताओं का काल कहा जाता है, इसलिए मकर संक्रांति पर किए गए पुण्य कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है. इसी कारण इस दिन स्नान, दान, पूजा और जप-तप का विशेष महत्व बताया गया है.

पवित्र नदियों में नहाने का महत्व 

मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. इस दिन सूर्य देव की विधिवत पूजा की जाती है और उन्हें अर्घ्य दिया जाता है. हिंदू शास्त्रों के अनुसार, मकर संक्रांति पर किए गए दान को “अक्षय पुण्य” कहा गया है, यानी इसका फल कभी समाप्त नहीं होता. उत्तर भारत के कई राज्यों में इस दिन खिचड़ी बनाने और खाने की परंपरा है. इसलिए इसे कई स्थानों पर खिचड़ी पर्व भी कहा जाता है.

मकर संक्रांति के दिन सूर्यास्त के बाद का समय भी विशेष रूप से शुभ माना जाता है. धर्म ग्रंथों में उल्लेख है कि इस समय कुछ खास कार्य करने से घर में सुख-समृद्धि आती है. सूर्यास्त के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है. शाम के समय मंदिर में या पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना शुभ संकेत माना जाता है. इसके अलावा, लड्डू गोपाल के सामने घी का अखंड दीपक जलाने से परिवार में शांति और खुशहाली बनी रहती है.

घर के मुख्य द्वार पर जलाएं दीपक 

इस दिन घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना भी शुभ माना गया है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का प्रवेश होता है. तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाने से जीवन में धन, स्वास्थ्य और समृद्धि बढ़ती है. माना जाता है कि तुलसी माता की कृपा से घर में कभी अभाव नहीं रहता.

जहां एक ओर मकर संक्रांति पर शुभ कार्यों का महत्व है, वहीं कुछ बातों से बचने की भी सलाह दी जाती है. इस दिन दक्षिण दिशा की यात्रा को अशुभ माना गया है. साथ ही, बड़ों का अपमान करना वर्जित है. मांस, मछली, शराब और लहसुन-प्याज जैसे तामसिक भोजन से दूरी बनाए रखना चाहिए. झूठ बोलना, क्रोध करना और कठोर वाणी का प्रयोग भी इस दिन अशुभ माना गया है.

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