चैंपियंस ट्रॉफी में इन पांच बल्लेबाजों पर रहेगी सभी की नजर, कभी भी पलट सकते हैं मैच का रुख

चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का 19 फरवरी से आगाज होने जा रहा है. टीम इंडिया टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए दुबई पहुंच चुकी है. दरअसल, चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का होस्ट इस बार पाकिस्तान है. लेकिन भारत के सभी मैच पाकिस्तान से बाहर खेले जाएंगे. ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत ने खिलाड़ियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान जाने से इनकार कर दिया है.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

चैंपियंस ट्रॉफी में हिस्सा ले रही आठ टीम में बहुत ज्यादा नए खिलाड़ी नहीं हैं और इस बात की संभावना बहुत कम है कि कम से कम बल्लेबाजी में मैच का रुख बदलने वाले खिलाड़ियों में कोई नया चेहरा उभर कर सामने आए. हालांकि गेंदबाजी विभाग में कुछ तेज गेंदबाज हो सकते हैं जो अंतर पैदा कर सकते हैं. आइए एक नजर डालते हैं इन पांच बल्लेबाजों पर जो अपनी-अपनी टीम के लिए निभा सकते हैं बड़ी भूमिका.

शुभमन गिल (भारत)

एकदिवसीय प्रारूप में 60 की शानदार औसत और 101 से अधिक के शानदार स्ट्राइक रेट के साथ सात शतक और 15 अर्धशतक लगाने वाले गिल ने 50 वनडे मुकाबलों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है. यह ऐसा प्रारूप है जिसमें वह विराट कोहली से जिम्मेदारी लेने वाले खिलाड़ी हो सकते हैं. कोहली और कप्तान रोहित शर्मा जैसे दो दिग्गज अब भी गिल का मार्गदर्शन कर रहे हैं और यह टूर्नामेंट गिल को सुपरस्टार से मेगास्टार में तब्दील कर सकता है.

ट्रेविस हेड (ऑस्ट्रेलिया)

पिछले कुछ साल ऑस्ट्रेलिया के इस बल्लेबाज के लिए सपने की तरह रहे हैं और आदर्श रूप से वह कभी नहीं चाहेंगे कि यह खत्म हो. उन्होंने पिछले कुछ समय से नॉक आउट मुकाबलों में भारत को काफी परेशान किया है और पाकिस्तान की बल्लेबाजी की अनुकूल पिचों पर हेड एक बार फिर गेंदबाजी आक्रमण को तहस-नहस करने के लिए तैयार हैं. भारतीय प्रशंसकों को अब भी 19 नवंबर, 2023 (विश्व कप फाइनल) का दर्द सालता है और हेड में विपक्षी टीमों का दिल दुखाने की क्षमता है.

सलमान अली आगा (पाकिस्तान)

सलमान का 45 से अधिक का औसत असाधारण तो नहीं है लेकिन जिन्होंने हाल ही में उन्हें बल्लेबाजी करते देखा है वे इस बात की पुष्टि करेंगे कि लाहौर का यह 31 वर्षीय बल्लेबाज आखिरकार अपनी पहचान बना रहा है. अगर त्रिकोणीय श्रृंखला को ट्रेलर माने तो उनके बल्ले से और भी बड़ी पारियां आने वाली हैं. वह एक क्लीन हिटर हैं और उनके पास तेज गेंदबाजों को खेलने के लिए बहुत समय है. उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 350 से अधिक के लक्ष्य का पीछा करते हुए जिस तरह चीजों को नियंत्रित किया वह असाधारण था.

डेवोन कॉनवे (न्यूजीलैंड)

कॉनवे का वनडे करियर छोटा है जिसमें उन्होंने केवल 33 मैच खेले हैं लेकिन इतने कम समय में ही उन्होंने दिखा दिया है कि वे अपनी इच्छानुसार गैप खोजने की क्षमता से मैच को अपने पक्ष में कर सकते हैं. वे स्पिनरों के खिलाफ बेहतरीन बल्लेबाज हैं और चाहे पाकिस्तान हो या दुबई, टी20 लीग क्रिकेट या अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने के लिए एशिया के दौरों ने उन्हें यहां की परिस्थितियों का अच्छा ज्ञान दिया है. अगर कॉनवे चल पड़े तो न्यूजीलैंड का काम आसान हो जाएगा.

हेनरिक क्लासेन (दक्षिण अफ्रीका)

चाहे टी20 हो या वनडे जब कोई मैच का रुख बदलने वाले खिलाड़ी की बात करता है तो हेनरिक क्लासेन को भूलना बहुत मुश्किल है जो बिना किसी परेशानी के गेंद बाउंड्री के पार पहुंचा सकते हैं. उन्होंने त्रिकोणीय श्रृंखला में एक मैच खेला लेकिन 56 गेंद पर 87 रन बनाए और शीर्ष स्तर के पाकिस्तानी आक्रमण के खिलाफ आसानी से रन बनाए. उन्होंने 58 मुकाबलों में 44 से अधिक के औसत और 117.44 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए हैं. वह एक और खिलाड़ी है जो उपमहाद्वीपीय पिचों पर आक्रमण करना जानता है. आदिल राशिद और एडम जंपा के खिलाफ क्लासेन की जंग देखने लायक होगी.

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