मद्रास हाईकोर्ट ने एमएस धोनी से मांगे 10 लाख रुपए, पूर्व भारतीय कप्तान ने किया था ये बड़ा 'कांड'
भारतीय पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को मद्रास हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने धोनी से 10 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया है.

नई दिल्ली: मद्रास हाईकोर्ट ने पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है. कोर्ट ने उन्हें 10 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया है. फिलहाल एमएस धोनी आईपीएल के अलावा किसी भी तरह का क्रिकेट नहीं खेलते हैं. ऐसे में उनके लिए यह बहुत बड़ा झटका है. आइए जानते हैं एमएस धोनी से कोर्ट ने 10 लाख रूपये की मांग क्यों की है.
100 करोड़ का मानहानि मुकदमा
यह मामला 2014 से चल रहा है. धोनी ने 100 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग करते हुए मानहानि का केस दायर किया था. मुकदमे में मुख्य आरोपी रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी जी. संपत कुमार हैं. साथ ही कुछ टीवी चैनल, पत्रकार और मीडिया हाउस भी शामिल हैं.
आरोप है कि 2013 के आईपीएल सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग घोटाले में धोनी का नाम जोड़ा गया था. इन लोगों ने टीवी पर और अन्य माध्यमों से ऐसी बातें कहीं, जिनसे धोनी की छवि खराब हुई. धोनी ने इसे झूठा और मानहानिकारक बताया और अदालत में केस किया.
सीडी के कंटेंट का ट्रांसक्रिप्शन क्यों जरूरी?
केस में धोनी ने कुछ सीडी सबूत के तौर पर पेश की है. इनमें टीवी डिबेट, न्यूज क्लिप और अन्य मीडिया सामग्री है. कोर्ट ने 28 अक्टूबर 2025 के आदेश में इन सीडी के कंटेंट को लिखित रूप में उतारने (ट्रांसक्रिप्शन) और अनुवाद करने का काम शुरू किया. यह काम कोर्ट के आधिकारिक इंटरप्रेटर को सौंपा गया है.
इंटरप्रेटर ने कोर्ट को बताया कि यह काम बहुत जटिल और समय लेने वाला है. इसमें एक इंटरप्रेटर और एक टाइपिस्ट को तीन-चार महीने तक पूरा समय लगाना पड़ेगा. इसलिए खर्च ज्यादा होगा.
धोनी को देना पड़ेगा सारा खर्च
कोर्ट ने कहा कि सामान्य नियमों के मुताबिक वादी यानी जो केस दायर करता है उसको ही ऐसे दस्तावेज तैयार करके पेश करने होते हैं, लेकिन इस मामले में कोर्ट के इंटरप्रेटर की जरूरत पड़ी, इसलिए खर्च वादी यानी धोनी को ही उठाना होगा. कोर्ट ने कुल 10 लाख रुपये का खर्च तय किया है.
जमा करने की समय सीमा
अदालत ने आदेश दिया कि धोनी को यह 10 लाख रुपये 12 मार्च 2026 तक मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रिलीफ फंड में जमा कराने होंगे. इंटरप्रेटर को निर्देश है कि मार्च 2026 के तीसरे सप्ताह तक ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद का काम पूरा कर दें. मामले की अगली सुनवाई भी 12 मार्च को होगी.
यह केस 12 साल पुराना है और कई अंतरिम याचिकाओं के कारण लंबा खिंच गया है. अब यह आदेश केस को आगे बढ़ाने में मदद करेगा.धोनी के वकील ने कोर्ट के आदेश का पालन करने की बात कही है.


