'किसी ने बेची जमीन, किसी ने गिरवी रखीं मां की चूड़ियां', लेकिन अब आम्रपाली हार्टबीट सिटी में बायर्स को नहीं मिल रही सुविधाएं

आम्रपाली हार्टबीट सिटी सेक्टर 107 में घर खरीदने वाले लोग आज भी अपने सपनों की चाबी तलाश रहे हैं. अधूरी सुविधाएं, बढ़ते CAM चार्ज, AOA की गैर-पारदर्शिता और NBCC की चुप्पी से लोग परेशान हैं. EMI और किराए के दोहरे बोझ ने परिवारों की ज़िंदगी रोक दी है. अब वे जवाब और न्याय की मांग कर रहे हैं.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

हमारे ख़्वाबों के महल की चाभियां कहां हैं? जब पैसा भरपूर लिया तो क्वालिटी बदतर क्यों? ये सवाल उनके हैं, जिन्होंने अपना पेट काट काट के एक ख्वाब संजोया था, अपने आशियाने का. एक सपनों के महल का. सेक्टर 107 की आम्रपाली हार्टबीट सिटी में घर लेने वाले हर रोज जागते हैं अपने अधूरे सपनों के साथ. यह वो जगह थी, जहां लोगों ने अपना सब कुछ लगाकर एक घर नहीं, एक सपना खरीदा था. लेकिन अब हर दरवाज़ा एक सवाल है… और हर सवाल के पीछे एक टूटी उम्मीद.

हमारे ख़्वाबों के महल की चाभियां कहां हैं?

यह सवाल आज सिर्फ़ एक पोस्टर पर नहीं लिखा था, यह हर मां की आंखों में था, हर पिता के माथे की शिकन में था. कभी यह सोसायटी 'लक्ज़री' कहकर बेची गई थी. लाखों की रक़म ली गई. हर सुविधा का वादा किया गया, पर अब CAM चार्जेस? 3.95 रुपये प्रति वर्ग फ़ीट- कोई तर्क नहीं, कोई सहमति नहीं.

बच्चों की रोकी पढ़ाई

सिंगल पॉइंट बिजली- जब पूछा गया, तो जवाब मिला- ऐसा ही है. AOA? कुछ सदस्य खुद ही फ्लैटों में अवैध निर्माण कर रहे हैं. काम कहां तक पहुंचा है? फेज़-1 में मात्र 60 मज़दूर. टाइमलाइन? कोई नहीं. लिफ्ट चालू नहीं, OC नहीं, PNG नहीं, बायर्स के लिए ब्याज माफी नहीं. कई लोगों ने बच्चों की पढ़ाई रोक दी, किसी ने शादी टाल दी, किसी ने तो अपने मां-बाप को गांव वापस भेज दिया. सिर्फ़ इसलिए कि EMI भी चुकानी है और किराया भी.

AOA और NBCC के दफ्तरों में जवाबों की जगह चुप्पी है और इसी चुप्पी में उभरती है आवाज़- निवासियों की मांगें. AOA की कार्यप्रणाली पारदर्शी हो. NBCC एक स्पष्ट टाइमलाइन और वर्कफोर्स प्लान दे. हर बड़े निर्णय में निवासियों की सहमति ली जाए. यह कहानी सिर्फ़ अमरपाली हार्टबीट सिटी की नहीं है, यह हर उस भारतीय की है जिसने अपनी ज़मीन बेच दी, मां की चूड़ियां गिरवी रख दीं और एक 'घर' का सपना देखा.

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